सर्पदंश से हुई बालक की मौत के बाद अस्पताल में नहीं मिली शव वाहन की सुविधा, परिजनों को मोटरसाइकिल पर शव ले जाने के लिए होना पड़ा मजबूर; स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
सिंगरौली/चितरंगी, 2 अगस्त। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। सर्पदंश से 8 वर्षीय बालक की मौत के बाद परिजनों को अस्पताल से शव घर ले जाने के लिए शव वाहन तक उपलब्ध नहीं हो सका। अंततः परिजन मासूम के शव को मोटरसाइकिल पर रखकर गांव ले जाने के लिए मजबूर हो गए। घटना का दृश्य जिसने भी देखा, वह भावुक हो उठा।
सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचे थे परिजन
जानकारी के अनुसार, ग्राम हरफरी निवासी बाबूलाल सिंह शनिवार सुबह करीब 8 बजे अपने 8 वर्षीय पुत्र को सर्पदंश के बाद उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चितरंगी लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा बालक का उपचार किया गया, लेकिन इलाज के दौरान दोपहर करीब 2 बजे उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद शुरू हुई परिजनों की परेशानी
मासूम की मौत के बाद परिजनों के सामने शव को घर ले जाने की समस्या खड़ी हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से शव वाहन उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन आरोप है कि अस्पताल में शव वाहन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। परिजनों ने काफी इंतजार और प्रयास किया, लेकिन जब कोई व्यवस्था नहीं हो सकी तो उन्हें मजबूरन मासूम के शव को मोटरसाइकिल पर रखकर गांव ले जाना पड़ा।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने जताई नाराजगी
मासूम के शव को मोटरसाइकिल पर ले जाने का दृश्य अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों के लिए भी बेहद पीड़ादायक था। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसे महत्वपूर्ण सरकारी अस्पताल में शव वाहन जैसी आवश्यक सुविधा का उपलब्ध न होना गंभीर चिंता का विषय है।
जिला प्रशासन से शव वाहन की स्थायी व्यवस्था की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे शव वाहन की सुविधा सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि किसी भी परिवार के लिए अपने परिजन की मौत का दुख पहले ही असहनीय होता है। ऐसे में शव को घर ले जाने के लिए भी यदि उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों पर सवाल
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब सरकार ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है, तो चितरंगी जैसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपात स्थिति में शव वाहन जैसी मूलभूत सुविधा क्यों उपलब्ध नहीं है?
मासूम की मौत के बाद शव को मोटरसाइकिल से ले जाने की घटना ने न केवल परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और प्रशासनिक तैयारियों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
रिपोर्ट: अमन सिंह, सिंगरौली






