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सुबह होने से पहले खुल जाती शराब की दुकान,और सिस्टम खामोश खड़ा देखता रहता पूरा मैदान…

रीवा शहर में शराब दुकानों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के समान थाना क्षेत्र में संचालित कंपोजिट शराब दुकान को लेकर स्थानीय लोगों, राहगीरों और ग्राहकों के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि यहां नियमों को खुलेआम ताक पर रखकर शराब की बिक्री की जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग और स्थानीय पुलिस सब कुछ देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि सुबह सूरज निकलने से पहले ही दुकान के शटर के नीचे से शराब बेची जाने लगती है। वहीं दिनभर प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब और बीयर बेचने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। लोगों का कहना है कि ग्राहक यदि अधिक दाम को लेकर सवाल उठाए तो विवाद और अभद्रता की स्थिति बन जाती है।


हाला की रेट सरकार तय करती है,लेकिन यहां बोतलों की कीमत ठेकेदार तय करता है… क्षेत्रीय नागरिकों के अनुसार यह शराब दुकान शहर के बेहद व्यस्त मार्ग पर संचालित हो रही है। बस स्टैंड, मार्ग और प्रमुख यातायात क्षेत्र के नजदीक होने के कारण यहां हर समय लोगों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद दुकान के आसपास शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब दुकान के आसपास खुलेआम ठेले संचालित हो रहे हैं, जहां देर रात तक भीड़ जमा रहती है। कई बार यहां विवाद और मारपीट जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।


सड़क किनारे जाम छलकते रहे,और लाल बत्ती की गाड़ियां बस गुजरती रहीं… लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर से लेकर आदित्य होटल और नेशनल हॉस्पिटल क्षेत्र तक शराबियों का जमावड़ा आम बात बन चुका है। राहगीरों और वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है, वहीं कई बार नशे में धुत लोग राह चलते लोगों से अभद्रता और विवाद भी करते हैं। इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि पुलिस पेट्रोलिंग वाहन रोज इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन कभी भी शराब दुकान के सामने जमा भीड़, अव्यवस्थित माहौल और कथित अवैध गतिविधियों पर सख्ती नहीं दिखाई जाती।


जब शिकायतें बढ़ती रहीं और कार्रवाई नहीं हुई,तब लोगों के बीच सवाल और गहरे होते गए… सूत्रों के हवाले से क्षेत्र में चर्चा है कि शराब ठेकेदारों और कुछ जिम्मेदार लोगों के बीच कथित सांठगांठ के चलते नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


लोगों का कहना है कि रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी लगातार जन समस्याओं को लेकर सक्रिय दिखाई देते हैं और गांव-गांव पहुंचकर जनचौपाल के माध्यम से लोगों की बात सुन रहे हैं। ऐसे में अब आमजन की नजर इस बात पर टिकी है कि शहर में शराब दुकानों को लेकर सामने आ रही शिकायतों और अव्यवस्थाओं पर जिला प्रशासन कब सख्त कदम उठाता है। वहीं स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और आबकारी विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। शराब दुकानों पर ओवररेटिंग, समय से पहले बिक्री, सार्वजनिक अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी शिकायतों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
अगर नियम सिर्फ कागज़ों में रह जाएंगे,तो सवाल सिस्टम पर ही उठेंगे…”
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया पर भी लोग शराब दुकानों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

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