गणेश चतुर्थी का पर्व आते ही देशभर में भक्ति और उत्सव का माहौल बन जाता है। जगह-जगह गणपति पंडाल सजते हैं, गलियां भक्ति गीतों और जयकारों से गूंज उठती हैं और लोग भगवान गणेश की आराधना में जुट जाते हैं। महाराष्ट्र से लेकर गोवा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पुडुचेरी तक गणेश उत्सव अलग-अलग परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया जाता है।
14 सितंबर से शुरू हुआ गणेशोत्सव
वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का उत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन संपन्न होगा। मुंबई का लालबागचा राजा, पुणे का दगडूशेठ गणपति और हैदराबाद का खैरताबाद गणेश देश के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।
1. मुंबई – लालबागचा राजा
मुंबई का लालबागचा राजा गणेश उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण माना जाता है। वर्ष 1934 से चली आ रही यह परंपरा देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। लालबाग क्षेत्र में उत्सव के दौरान भव्य सजावट, जुलूस और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलता है। श्रद्धालु इसके साथ सिद्धिविनायक मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं।
2. पुणे – दगडूशेठ हलवाई गणपति
पुणे का श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति महाराष्ट्र की पारंपरिक गणेशोत्सव संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। इसकी परंपरा 19वीं सदी के अंतिम दौर से जुड़ी बताई गई है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
3. हैदराबाद – खैरताबाद गणेश
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में खैरताबाद गणेश अपने विशाल आकार के लिए प्रसिद्ध है। वर्ष 2026 में यहां 69 फीट ऊंची पंचमुखी संकटहरा महागणपति प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रहेगी। इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
4. कनिपाकम – वरसिद्धि विनायक मंदिर
आंध्र प्रदेश के कनिपाकम स्थित श्री वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। यहां भगवान गणेश की स्वयंभू प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। गणेश चतुर्थी के समय मंदिर का वार्षिक ब्रह्मोत्सव भी आयोजित होता है।
5. गणपतिपुले – समुद्र किनारे स्वयंभू गणपति
महाराष्ट्र का गणपतिपुले धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। यहां स्वयंभू गणपति मंदिर स्थित है। गणेश चतुर्थी के दौरान शांत समुद्र तटीय क्षेत्र में उत्सव का विशेष माहौल दिखाई देता है।
6. गोवा – चवथ
गोवा में गणेश चतुर्थी को स्थानीय रूप से चवथ कहा जाता है। यहां उत्सव बड़े सार्वजनिक पंडालों के बजाय परिवार और समुदाय केंद्रित परंपराओं के लिए जाना जाता है। घरों में सजावट, पूजा और पारंपरिक व्यंजनों के साथ उत्सव मनाया जाता है। यहां की खास परंपरा माटोली है, जिसमें गणपति प्रतिमा के ऊपर फल, सब्जियों और वन उपज से सजावट की जाती है।
7. अष्टविनायक – आठ पवित्र गणेश मंदिरों की यात्रा
महाराष्ट्र का अष्टविनायक सर्किट गणपति भक्तों के लिए विशेष धार्मिक यात्रा है। इसमें मोरगांव, सिद्धटेक, पाली, महड, थेऊर, लेण्याद्री, ओझर और रांजणगांव के आठ प्रमुख गणेश मंदिर शामिल हैं।
8. जयपुर – मोती डूंगरी गणेश मंदिर
राजस्थान के जयपुर में स्थित मोती डूंगरी गणेश मंदिर गणेश भक्तों के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।
9. इंदौर – खजराना गणेश मंदिर
मध्य प्रदेश के इंदौर का खजराना गणेश मंदिर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। गणेश चतुर्थी के दौरान मंदिर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है। दर्शन के साथ श्रद्धालु इंदौर के प्रसिद्ध खान-पान और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों का भी आनंद ले सकते हैं।
10. पुडुचेरी – मनाकुला विनयागर मंदिर
पुडुचेरी का मनाकुला विनयागर मंदिर गणेश उत्सव के लिए एक अलग पहचान रखता है। यह मंदिर शहर के फ्रेंच क्वार्टर के बीच स्थित है और इसकी वास्तुकला तथा धार्मिक परंपराएं तमिल और फ्रांसीसी सांस्कृतिक प्रभावों का अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं।

आस्था के साथ भारत की विविध संस्कृति का अनुभव
गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक जीवन को करीब से देखने का अवसर भी है। मुंबई और हैदराबाद के भव्य आयोजनों से लेकर गोवा के पारिवारिक चवथ, महाराष्ट्र की अष्टविनायक यात्रा और मध्य प्रदेश के खजराना गणेश मंदिर तक, देश के अलग-अलग हिस्सों में गणपति उत्सव का अपना अनूठा स्वरूप देखने को मिलता है।






