स्थान : बाणसागर ,
विशेष संवाददाता, विंध्य सिटी न्यूज।
: : शिक्षा के मंदिर में मासूम बच्चों के हक पर डाका डालने और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सतखुरी में व्यवस्थाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर हैं। यहाँ बच्चों को न तो सरकार की योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है और न ही गरिमापूर्ण माहौल।प्रभारी प्रधानाध्यापक और मिड-डे मील (मध्यान्ह भोजन) संचालित करने वाले समूह की कथित मिलीभगत के चलते स्कूल भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का केंद्र बन चुका है।
: : मीनू गायब, बच्चों की थाली से पौष्टिकता गायब : सरकार द्वारा बच्चों को कुपोषण से बचाने और स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने के लिए तय मीनू के अनुसार भोजन देने का नियम है। लेकिन सतखुरी के इस स्कूल में नियमों को ठेंगा दिखा दिया गया है। आरोप है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक और भोजन बनाने वाले समूह की साठगांठ के कारण बच्चों को घटिया और बिना मीनू का खाना परोसा जा रहा है। बच्चों के हिस्से का पौष्टिक राशन कहाँ जा रहा है l साथ ही विद्यालय में 42 बच्चे दर्ज हैं और एक ही रसोईया के भरोसे मध्यान भोजन कार्य किया जा रहा दूसरी रसोईया का पता नहीं है ऐसे में रसोईया के बीमार होने या आवश्यक कार्य पड़ जाने से विद्यालय नहीं आने पर बच्चों को सही समय में भोजन कैसे मिलता होगा यह भी जांच का विषय है l
: : शौचालय पर लटका रहता है ताला, बाहर जाने को मजबूर बेटियां : स्कूल परिसर में बना सरकारी शौचालय केवल कागजों और शो-पीस के लिए है, क्योंकि इस पर हमेशा ताला जड़ा रहता है। जिससे शासन की स्वच्छता जैसी योजना पर ग्रहण लगा हुआ है और इस भीषण लापरवाही के कारण स्कूल के बालक और विशेषकर बालिकाओं को खुले में, स्कूल से काफी दूर शौच के लिए जाने पर मजबूर होना पड़ता है, जिसके कारण किसी अनहोनी और हादसे का डर बना रहता है।
: : प्यास बुझाने के लिए स्कूल से दूर जाने की मजबूरी : कड़कड़ाती धूप हो या सामान्य दिन, इस स्कूल के बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए परिसर से बाहर, दूर जाना पड़ता है। स्कूल के भीतर लगी पानी की टोटी और छत के ऊपर रखी पानी की टंकी सूखी पड़ी हुई है ,पानी पीने की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई छोड़-छोड़कर पानी की तलाश में स्कूल से बाहर जाने को मजबूर हैं इस प्रकार की समस्याओं पर स्कूल प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं l
: : पढ़ाई छोड़कर झाड़ू-पोछा कर रहे मासूम : हद तो तब हो जाती है जब शिक्षा हासिल करने आए बच्चों के हाथों में कलम की जगह झाड़ू थमा दी जाती है। स्कूल के कमरों और परिसर की साफ-सफाई की पूरी जिम्मेदारी भी मासूम बच्चों पर डाल दी गई है। खुद प्रभारी प्रधानाध्यापक बच्चों से यह काम करवाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
: : ग्रामीणों में भारी आक्रोश, जांच की मांग : स्कूल की इस बदहाली और बच्चों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर पालकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि आला अधिकारियों को इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए।






