पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर, उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के गृह क्षेत्र का मामला
नईगढ़ी। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर और उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित कर रही है, लेकिन फुलहा उप स्वास्थ्य केंद्र सरकारी दावों की जमीनी हकीकत उजागर करता दिखाई दे रहा है। यहां का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि उसे देखकर कोई भी व्यक्ति अंदर जाने से पहले कई बार सोचने पर मजबूर हो जाए।
दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, कई जगहों पर ईंटें बाहर झांक रही हैं, छत और दीवारों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। भवन की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह किसी भी समय भरभराकर गिर सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग प्राथमिक उपचार के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर यहां कैसे आएं?
मरीजों के साथ कर्मचारियों की जान भी खतरे में
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी इसी भवन में बैठकर अपनी सेवाएं देते हैं। लेकिन जब भवन स्वयं ही असुरक्षित हो तो आखिर कर्मचारी यहां बैठकर इलाज कैसे करें? यदि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से भवन की हालत खराब बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा न तो मरम्मत कराई गई और न ही नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
वीआईपी क्षेत्र में बदहाली की तस्वीर
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह स्वास्थ्य केंद्र पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। वहीं यह मामला प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के गृह क्षेत्र से भी जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल कई सवाल खड़े कर रहा है।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार?
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। छत से पानी टपकता है और भवन की जर्जरता और बढ़ जाती है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर दिखाने में लगे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदतर हैं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि फुलहा उप स्वास्थ्य केंद्र का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और भवन को उपयोग के लिए सुरक्षित घोषित किए जाने तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही नए भवन के निर्माण अथवा व्यापक मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी जाए।
बड़ा सवाल
- जब इलाज देने वाला स्वास्थ्य केंद्र ही खुद इलाज की हालत में पहुंच जाए, तो ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
- क्या प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं, या फिर समय रहते ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?






