ब्योहारी(शहडोल) I जिले के स्कूली छात्रों के व्यापक हित और उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए जिले में ‘अपार आईडी’ कार्ड बनाने का महाअभियान तेजी से जारी है। कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के मार्ग निर्देशन में छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा निर्णय लिया है। जून माह के प्रत्येक शनिवार को जिले के सभी क्षेत्रों में ‘मेगा अपार डे’ का आयोजन किया जाएगा। इस क्रम में अगला भव्य जिला में ‘मेगा अपार डे’ आगामी 13 जून को आयोजित होने जा रहा है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की बड़ी पहल कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने संयुक्त रूप से सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कोई भी छात्र इस महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान से वंचित न रहे। जिला शिक्षा अधिकारी आर.के. मंगलानी और जिला परियोजना समन्वयक अमरनाथ सिंह ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं ब्लॉक रिसोर्स केंद्र समन्वयक को जमीनी स्तर पर इसकी शत-प्रतिशत मॉनिटरिंग के आदेश दिए हैं।
संकुल प्राचार्यों को निर्देश : हर सप्ताह लगाएं विशेष कैंप डीईओ आर.के. मंगलानी और डीपीसी अमरनाथ सिंह ने सख्त लहजे में कहा है कि सभी संकुल प्राचार्य अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में हर सप्ताह अनिवार्य रूप से ‘विशेष कैंप’ का आयोजन करें। इन शिविरों के माध्यम से छूटे हुए सभी विद्यार्थियों की अपार आईडी वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ प्राथमिकता के आधार पर बनाई जाएगी।
ब्योहारी विकासखंड अधिकारी श्री ब्रह्मानंद श्रीवास्तव ने बताया क्या है अपार आईडी और क्यों है जरूरी? यह केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, एक स्टूडेंट आईडी’ योजना का हिस्सा है, जो छात्र के जीवनभर काम आएगी। इसमें छात्र के खेलकूद, परीक्षा परिणाम, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां डिजिटल रूप से दर्ज रहेंगी।और स्कूल बदलने या कॉलेज एडमिशन के समय कागजी दस्तावेजों की जरूरत नहीं पड़ेगी। शिक्षा विभाग ने सभी पालकों और छात्रों से अपील की है कि वे आगामी 13 जून (शनिवार) को अपने नजदीकी संकुल केंद्र या स्कूल में आयोजित होने वाले विशेष कैंप में पहुंचकर अपनी ‘अपार आईडी’ अनिवार्य रूप से बनवाएं।
बीआरसी मनोज केसरवानी का संदेश :“अपार आईडी केवल एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह हमारे विद्यार्थियों के पूरे शैक्षणिक सफर का एक सुरक्षित डिजिटल लॉकर है। ब्योहारी विकासखंड का कोई भी पात्र छात्र इस सुविधा से वंचित न रहे, इसके लिए सभी शिक्षक मिशन मोड में काम करें और अभिभावकों को इसके महत्व से अवगत कराएं।”






