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Aman Singh Singrauli

सिंगरौली प्रशासनिक आदेशों में स्पष्टता जितनी आवश्यक होती है, उतनी ही जरूरी उनकी भाषा भी होती है सिंगरौली जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा 25 जून को जारी आदेश और उसके अगले ही दिन जारी स्पष्टीकरण ने यही सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पहला आदेश जल्दबाजी में जारी किया गया था, या फिर विरोध के बाद उसकी व्याख्या बदलनी पड़ी? पहले आदेश में साफ शब्दों में कहा गया था कि बिना सक्षम अनुमति पत्रकारों एवं सामान्य जन को विद्यालयों में प्रवेश नहीं दिया जाए आदेश का आधार छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और शासकीय कार्यों में व्यवधान को बताया गया लेकिन जैसे ही यह आदेश सार्वजनिक हुआ, पत्रकार संगठनों और सामाजिक वर्गों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा और तीखी प्रतिक्रिया सामने आई विरोध बढ़ने के महज 24 घंटे के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि आदेश का उद्देश्य मीडिया की भूमिका को सीमित करना नहीं था इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है तथा आदेश केवल बिना अनुमति आने वाले बाहरी व्यक्तियों और कथित “इन्फ्लुएंसर्स” के लिए था यहीं सबसे बड़ा प्रश्न खड़ा होता है यदि आदेश केवल इन्फ्लुएंसर्स या अनधिकृत व्यक्तियों के लिए था, तो पहले आदेश में सीधे “पत्रकारों एवं सामान्य जन” शब्दों का प्रयोग क्यों किया गया? क्या आदेश जारी करते समय भाषा की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया गया, या फिर विरोध के बाद स्थिति संभालने के लिए स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा? यह भी उल्लेखनीय है कि स्पष्टीकरण में कार्यालय ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 29(2) का हवाला देते हुए स्वतंत्र एवं उत्तरदायी पत्रकारिता के सम्मान की बात कही इससे यह संदेश तो गया कि मीडिया की भूमिका स्वीकार की जा रही है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रारंभिक आदेश की शब्दावली विवाद का कारण बनी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन और मीडिया दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं विद्यालयों में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना प्रशासन का दायित्व है, वहीं जनहित के मुद्दों को सामने लाना मीडिया का कर्तव्य ऐसे में आदेश ऐसे होने चाहिए जिनमें न तो भ्रम की स्थिति बने और न ही किसी संवैधानिक अधिकार पर अनावश्यक सवाल उठें फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पहला आदेश प्रशासनिक चूक था, या फिर बढ़ते विरोध के बीच जारी स्पष्टीकरण एक नुकसान नियंत्रण (डैमेज कंट्रोल) की कोशिश ? यह चर्चा अब भी जिले में जारी है।

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