रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर ग्राम स्तर पर प्रशासन की पहल, कई समस्याओं का मौके पर हुआ निराकरण
रीवा। रीवा जिले की गुढ़ तहसील अंतर्गत दुआरी सर्किल की गौरा पंचायत में रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशानुसार जनसमस्याओं के निराकरण एवं ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से जन चौपाल चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सुधाकर सिंह के नेतृत्व में हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
जन चौपाल के दौरान प्रशासनिक अमला ग्राम पंचायत गौरा पहुंचा, जहां अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा मौके पर ही उनके समाधान का प्रयास किया। बताया गया कि सभी संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी शाम लगभग 5 बजे गौरा पंचायत पहुंचे और ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उनकी शिकायतों, समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों द्वारा पेयजल, राजस्व, सड़क, आवास, पेंशन, प्रमाण-पत्र, विद्युत व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित समस्याएं रखी गईं। इनमें से कई समस्याओं का तत्काल निराकरण किया गया, जबकि शेष समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने बताया कि रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशानुसार आयोजित इस जन चौपाल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, सामाजिक विश्वास को मजबूत करना तथा शासन की योजनाओं एवं सेवाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाना है। इस पहल के माध्यम से प्रशासन ग्रामीणों की समस्याओं को उनके गांव में ही सुनकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि जन चौपाल में प्राप्त अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया, जबकि शेष समस्याओं को आगामी दिनों में निराकृत करने का भरोसा ग्रामीणों को दिलाया गया। साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि कलेक्टर के निर्देशानुसार इस प्रकार की जन चौपालें विकासखंड स्तर के चयनित गांवों में लगातार आयोजित की जाएंगी, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही प्रशासनिक सहायता उपलब्ध हो सके।
प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से विकासखंड अथवा जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि अधिकारियों की उपस्थिति उनके गांव में ही सुनिश्चित हो और वे सहज रूप से अपनी समस्याओं का निराकरण प्राप्त कर सकें।






