कटनी: विकास की राह में आने वाली तमाम भौगोलिक चुनौतियों और बाधाओं को पार करते हुए आखिरकार मध्य प्रदेश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। सूबे के कटनी जिले में बन रही देश की सबसे लंबी वाटर टनल (स्लीमनाबाद टनल) का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। पिछले 17 वर्षों से चल रहे इस मेगा प्रोजेक्ट ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन अब जून के अंत तक इसकी खुदाई पूरी होने की उम्मीद है।इस टनल के शुरू होते ही नर्मदा नदी का पानी पहली बार विंध्य पर्वतमाला के सीने को चीरकर आगे बढ़ेगा और मध्य प्रदेश के 5 जिलों के लाखों लोगों की प्यास बुझाने के साथ-साथ खेतों को भी हरा-भरा करेगा।
सिर्फ 85 मीटर खुदाई शेष, जून अंत तक लक्ष्य
बरगी व्यपवर्तन योजना के तहत वर्ष 2008 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बरगी बांध के नर्मदा जल को सूखा प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना है। जमीन से 80 से 100 फुट नीचे बन रही इस 11.95 किलोमीटर लंबी भूमिगत टनल में अब सिर्फ 85 मीटर के आस-पास खुदाई बाकी है।
कटनी कलेक्टर अभिषेक तिवारी के अनुसार, फिलहाल प्रतिदिन 3 से 4 मीटर खुदाई की जा रही है, जिससे उम्मीद है कि 1 महीने के भीतर खुदाई का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद केबलिंग और अन्य तकनीकी कार्यों में करीब 1 महीने का समय और लगेगा।
जब अमेरिकी मशीनें भी हो गईं फेल
स्लीमनाबाद क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना इतनी जटिल थी कि इसने दुनिया के बेहतरीन इंजीनियरों को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
संगमरमर, चूना पत्थर, डोलोमाइट और स्लेट की सख्त परतों के कारण: वर्ष 2011 में बुलाई गई अमेरिकी रोबिन्स टनल बोरिंग मशीन (TBM) भी यहां खुदाई के दौरान टूट गई।
*शुरुआती महज 1.6 किलोमीटर की खुदाई करने में ही साढ़े छह साल का लंबा वक्त लग गया।
*बाद में इस काम को गति देने के लिए जर्मन तकनीक और नई मशीनों का सहारा लिया गया।
चुनौतियों का पहाड़: 300 से ज्यादा सिंकहोल और दोगुनी हुई लागत
17 साल के इस सफर में प्रोजेक्ट को कई बड़ी त्रासदियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा:
सिंकहोल का संकट: निर्माण के दौरान 300 से अधिक बार सिंकहोल (जमीन धंसने) की घटनाएं हुईं।
जान-माल का नुकसान: कई जगहों पर जहरीली गैस का रिसाव हुआ, अचानक पानी का तेज बहाव आया और मिट्टी धंसने से कई मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा, करीब 80 परिवारों को विस्थापित भी करना पड़ा।
बजट हुआ दोगुना: इन अप्रत्याशित चुनौतियों के कारण प्रोजेक्ट की शुरुआती अनुमानित लागत 799 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 1600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
197 किमी लंबी नहर प्रणाली से इन जिलों की बदलेगी किस्मत
यह पूरी परियोजना केवल टनल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत 197 किलोमीटर लंबी नहर, पाइपलाइन और टनल प्रणाली का एक विशाल नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। हालांकि, लंबे समय से तैयार पड़ी नहर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त (डैमेज) हो चुकी है, जिसके सुधार के लिए प्रशासन ने टेंडर जारी कर दिए हैं।
इन 5 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ:
कटनी
मैहर
सतना
पन्ना
रीवा
बड़ी राहत: इस परियोजना के पूर्ण होते ही विंध्य क्षेत्र के इन जल संकट प्रभावित जिलों के हजारों किसानों को बारहमासी सिंचाई की सुविधा मिलेगी और क्षेत्र का दशकों पुराना पेयजल संकट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।






