औचक निरीक्षण में खुली शिक्षा व्यवस्था की हकीकत, कक्षाओं में फर्नीचर की कमी पर जताई नाराजगी
चितरंगी। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोपला में शुक्रवार को एसडीएम देवेंद्र द्विवेदी और तहसीलदार नागेश्वर प्रसाद पनिका के औचक निरीक्षण से शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आई। अधिकारी जब विद्यालय पहुंचे तो उन्होंने महज औपचारिक निरीक्षण तक सीमित रहने के बजाय स्वयं कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया और शिक्षक की भूमिका निभाते हुए उन्हें पाठ भी पढ़ाया।
एसडीएम और तहसीलदार ने अलग-अलग कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछे और उनके शैक्षणिक स्तर को परखा। अधिकारियों ने यह भी जाना कि विद्यालय में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही हैं या नहीं। विद्यार्थियों से सीधे संवाद के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई जानकारियां सामने आईं।
अधिकारी बने शिक्षक, बच्चों से पूछे सवाल
निरीक्षण के दौरान एसडीएम और तहसीलदार ने विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाने के साथ उनसे सवाल-जवाब किए। अधिकारियों ने शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कक्षाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कक्षाओं में टेबल-कुर्सियां नहीं मिलीं, बीईओ को लगाई फटकार
निरीक्षण के दौरान कुछ कक्षाओं में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था नहीं मिली। इस पर एसडीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मौके से ही ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) से फोन पर चर्चा की और तत्काल आवश्यक फर्नीचर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
केवल उपस्थिति नहीं, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई भी जरूरी
अधिकारियों ने कहा कि विद्यालय में केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों की नियमित पढ़ाई, उनका शैक्षणिक स्तर और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के सख्त तेवर से शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन को स्पष्ट संदेश मिला कि शैक्षणिक कार्य में लापरवाही अथवा व्यवस्थाओं में कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।






