Aman Singh Singrauli
सिंगरौली/चितरंगी जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे की हालिया बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी परिणामों पर जोर देना चाहता है सरपंचों, सचिवों और रोजगार सहायकों के साथ हुई इस बैठक में जिन मुद्दों को उठाया गया, वे लंबे समय से ग्रामीण जनजीवन को प्रभावित करते रहे हैं—चाहे वह पेयजल संकट हो, बिजली बिलों की विसंगतियां हों या फिर बुनियादी सुरक्षा इंतजाम पेयजल को प्राथमिकता देने की बात कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार सीईओ ने इसे “तत्काल समाधान” के दायरे में रखने की बात कही है यह देखना अहम होगा कि आश्वासन कितनी तेजी से वास्तविक राहत में बदलता है इसी तरह, बिजली कनेक्शन न होने के बावजूद भारी-भरकम बिलों की शिकायतें ग्रामीण व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करती हैं अलग से बैठक कर समाधान निकालने की बात एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन इससे अधिक जरूरी है कि जिम्मेदारी तय हो खुले कुओं पर एक मीटर ऊंची मुंडेर बनाने का निर्देश सीधे तौर पर जन सुरक्षा से जुड़ा हुआ है अक्सर छोटी लापरवाही बड़े हादसों का कारण बनती है, ऐसे में यह पहल सराहनीय है बशर्ते इसे कागजों से निकालकर जमीन पर उतारा जाए विद्यालयों में खराब चापाकलों को लेकर पीएचई विभाग को दी गई सख्त चेतावनी भी बताती है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी समय-सीमा तय करना प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है, लेकिन इसकी नियमित निगरानी ही इसे प्रभावी बना सकती है बस स्टैंड स्थित शौचालय की बदहाल स्थिति पर सीईओ की प्रतिक्रिया यह भी दर्शाती है कि कई समस्याएं अब तक उच्च स्तर तक पहुंच ही नहीं पाती थीं यह स्थिति स्थानीय स्तर पर जवाबदेही की कमी को उजागर करती है अवैध दुकानों पर कार्रवाई और पंचायत स्तर पर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निलंबन की प्रक्रिया शुरू करना भी प्रशासनिक सख्ती का संकेत है कुल मिलाकर, यह बैठक केवल निर्देशों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रशासनिक दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत देती है अब असली कसौटी यही होगी कि ये निर्देश कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू होते हैं अगर अमल मजबूत रहा, तो चितरंगी क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है—अन्यथा यह भी एक और “बैठक” बनकर रह जाएगी।






