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Aman Singh Singrauli

सिंगरौली 26 मार्च 2026चितरंगी उपखंड मुख्यालय से सामने आया एक गंभीर मामला प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। जिस स्थान को शासन-प्रशासन का केंद्र माना जाता है, उसी एसडीएम कार्यालय के ठीक सामने स्थित सरकारी पीसीसी सड़क पर अतिक्रमण कर पक्की बिल्डिंग खड़ी कर दी गई है। हैरानी की बात यह है कि इस निर्माण कार्य के दौरान न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी ने संज्ञान लिया और न ही अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क के किनारे से शुरू हुआ यह अतिक्रमण धीरे-धीरे मुख्य मार्ग तक फैल गया और अब वहां स्थायी निर्माण कर दुकान व होटल तक संचालित किए जा रहे हैं। यह सब कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की आंखों के सामने हो रहा है, क्योंकि इसी मार्ग से प्रतिदिन एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी सहित अन्य अधिकारी गुजरते हैं।“नाक के नीचे कब्जा, फिर भी बेखबर जिम्मेदार”सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिस सड़क से होकर प्रशासनिक अमला रोजाना आवागमन करता है, उसी सड़क के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि उपखंड कार्यालय के सामने ही अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं, तो ग्रामीण अंचलों में सरकारी जमीनों की स्थिति और भी बदतर हो सकती है।लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें भी की गईं, लेकिन न तो मौके पर निरीक्षण हुआ और न ही अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई की गई। इससे यह प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी या तो जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई से बच रहे हैं।सड़क सिमटी, व्यवस्था ठपअतिक्रमण के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है, जिससे वाहनों के आवागमन में दिक्कतें बढ़ गई हैं। वहीं नाली निर्माण और जल निकासी की योजना भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। बरसात के मौसम में यहां जलभराव की स्थिति बनने की पूरी आशंका है, जिससे स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।शिवपुरवा में भी दोहराई जा रही कहानीचितरंगी मुख्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि शिवपुरवा क्षेत्र में भी सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वहां भी धीरे-धीरे सड़क किनारे निर्माण कार्य बढ़ रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्ती नहीं दिखाई जा रही।कार्रवाई नहीं तो बढ़ेगा अतिक्रमण का दायराविशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई, तो अतिक्रमण की प्रवृत्ति और बढ़ेगी। इससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान होगा, बल्कि विकास कार्यों की गति भी प्रभावित होगी।बड़ा सवाल—जवाबदेही तय कब?इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब प्रशासनिक मुख्यालय के सामने ही सरकारी सड़क सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की जमीन और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस स्पष्ट अतिक्रमण पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या “चिराग तले अंधेरा” की यह कहावत यूं ही सच साबित होती रहेगी।

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