Aman Singh Singrauli
सिंगरौली (म.प्र.) चितरंगी तहसील अंतर्गत स्थित सबस्टेशन बीछी में एक कर्मचारी द्वारा कथित रूप से फर्जी ITI डिग्री के आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आया है। गंभीर आरोपों और शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा केवल डिमोशन की कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया गया है। अब तक इस प्रकरण में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्या है मामला? सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी अनुराग सिंह चंदेल ने ITI (Electrician) वर्ष 2014–2016 में उत्तीर्ण होना दर्शाया है, जबकि उसकी 10वीं कक्षा मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल से वर्ष 2017 में उत्तीर्ण बताई गई है।इस स्थिति में ITI पहले और 10वीं बाद में पास होना नियमों के विपरीत माना जा रहा है जांच में उठे गंभीर सवाल बिना 10वीं उत्तीर्ण किए ITI में प्रवेश संभव नहींITI प्रमाणपत्र में NCVT/SCVT का स्पष्ट उल्लेख नहींविभागीय जांच के बाद भी केवल डिमोशन की कार्रवाईऐसे में यह प्रश्न उठता है कि यदि मामला गलत नहीं था तो डिमोशन क्यों किया गया, और यदि आरोप सही हैं तो आपराधिक प्रकरण दर्ज क्यों नहीं हुआ शिकायतें, लेकिन कार्रवाई अधूरी मामले में 23 फरवरी 2026 कोमध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी में लिखित शिकायतCM हेल्पलाइन (181) पर शिकायतपुलिस चौकी बगदरा में FIR हेतु आवेदनदिए गए, लेकिन अब तक पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं किया गया है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है कानूनी पहलू कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है पुलिस की भूमिका पर सवालसूत्रों के मुताबिक, पुलिस चौकी स्तर पर यह कहकर FIR दर्ज नहीं की गई कि “विभाग से लिखित पत्र मिलने के बाद ही कार्रवाई होगी”, जबकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना अनिवार्य है।🔥 मामला पहुंचेगा उच्च स्तर परशिकायतकर्ता अब इस मामले कोपुलिस अधीक्षकमध्य प्रदेश लोकायुक्तन्यायालय (धारा 156(3))तक ले जाने की तैयारी में है बड़ा सवालक्या फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी करने वालों को संरक्षण मिल रहा है?क्या विभाग और पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में आएगी?फिलहाल, पूरे मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।










