सिंगरौली/चितरंगी। चितरंगी तहसील में निजी विद्यालयों की मान्यता नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि नियमों को दरकिनार कर स्कूलों का रिन्यूअल धड़ल्ले से किया जा रहा है बीआरसीसी और डीपीसी कार्यालयों में “सुविधा शुल्क” के दम पर ऐसे स्कूलों को भी क्लीन चिट दी जा रही है, जो शिक्षा के न्यूनतम मानकों तक पर खरे नहीं उतरते कुछ माह पूर्व एसडीएम सौरभ मिश्रा ने निजी स्कूलों की विस्तृत जानकारी 15 दिनों के भीतर मांगी थी, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। आज तक संबंधित जानकारी एसडीएम कार्यालय तक नहीं पहुंच सकी, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसडीएम कार्यालय के पास ही संचालित एक निजी स्कूल वर्षों से दुकाननुमा भवन में चल रहा है। यहां प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी है और शिक्षक केवल कागजों में दर्ज हैं। ऐसे में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने की आशंका जताई जा रही है। चितरंगी मुख्यालय में ही कई स्कूल एक-दो कमरों में संचालित हो रहे हैं, जिन्हें विभाग द्वारा मान्यता प्रदान की गई है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष भी इसी तरह अयोग्य स्कूलों का रिन्यूअल किया गया था और इस वर्ष भी वही प्रक्रिया दोहराई जा रही है। अधिकारियों की चुप्पी और एसडीएम के आदेशों की अनदेखी से यह स्पष्ट होता है कि विभाग में ‘सेटिंग’ का खेल जारी है अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।






