Aman Singh Singrauli
चितरंगी क्षेत्र में रसोई गैस और पेट्रोल की किल्लत ने आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर समाधान की बजाय चुप्पी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है उपखंड अधिकारी (एसडीएम) द्वारा गैस एजेंसी संचालकों और पेट्रोल पंप डीलरों के साथ बैठक तो की गई, पर उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक न करना कई सवाल खड़े करता है जनता का आरोप है कि एक ओर बुकिंग के बावजूद समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी के जरिए ऊंचे दामों पर सप्लाई जारी है ऐसे में प्रशासनिक बैठक से पारदर्शिता और राहत की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हो सकी पत्रकारों के सवालों पर एसडीएम का जानकारी देने से इंकार करना प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है जिला कलेक्टर द्वारा भी मामले में संज्ञान लेने और जानकारी साझा करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है इससे यह धारणा मजबूत होती है कि प्रशासन समस्या की गंभीरता को समझने के बावजूद प्रभावी हस्तक्षेप करने में विफल रहा है सबसे बड़ा सवाल यही है कि जनता से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर हुई चर्चा को गोपनीय रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या यह बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह गई, या वाकई कोई ठोस निर्णय लिया गया है, जिसे सार्वजनिक करने से परहेज किया जा रहा है? प्रशासन की यह चुप्पी न केवल जनविश्वास को कमजोर कर रही है, बल्कि कालाबाजारी जैसे गंभीर मुद्दों को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा भी दे रही है। अब आवश्यकता है पारदर्शिता, त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की—ताकि आमजन को राहत मिल सके और व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके।






