हिंदू धर्मग्रंथों में शिव पुराण का विशेष महत्व बताया गया है। इसमें भगवान शिव की महिमा, रहस्य और जीवन-मृत्यु से जुड़े गूढ़ संकेतों का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव ने ये संकेत देवी पार्वती को बताए थे, जिनसे मनुष्य अपनी मृत्यु के निकट होने का आभास कर सकता है।
आइए जानते हैं वे 10 संकेत, जिनका उल्लेख शिव पुराण में मिलता है और जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं—
मृत्यु से पहले मिलते हैं ये 10 संकेत
- बायां हाथ बार-बार फड़कना
यदि किसी व्यक्ति का बायां हाथ लगातार फड़कता रहे और शांत न हो, तो इसे मृत्यु निकट होने का संकेत माना गया है। - गला और तालू सूखना
बार-बार पानी पीने के बावजूद गला सूखना और प्यास न बुझना—यह एक माह के भीतर मृत्यु का संकेत बताया गया है। - सूर्य या चंद्रमा के चारों ओर काला या लाल घेरा दिखना
यदि किसी व्यक्ति को सूर्य या चंद्रमा के आसपास काला या लाल घेरा दिखाई देने लगे, तो यह 15 दिनों के भीतर मृत्यु का संकेत माना गया है। - नीली मक्खियों का घेर लेना
अचानक नीली मक्खियों का शरीर पर मंडराना एक महीने के भीतर मृत्यु का संकेत माना गया है। - शरीर का रंग बदलना
शरीर का अचानक नीला या पीला पड़ जाना या लाल निशान उभर आना—यह छह महीने के भीतर मृत्यु का संकेत बताया गया है। - इंद्रियों का काम करना बंद करना
मुंह, कान, आंख या जीभ का अचानक ठीक से काम न करना—यह भी छह माह के भीतर मृत्यु का संकेत माना गया है। - चांद-तारे काले दिखना
यदि किसी व्यक्ति को चांद-तारे ठीक से न दिखें या काले नजर आएं, तो इसे भी अशुभ संकेत कहा गया है। - सिर पर गिद्ध, कौआ या कबूतर का बैठना
मान्यता है कि यदि अचानक कोई पक्षी सिर पर आकर बैठ जाए, तो एक माह के भीतर मृत्यु हो सकती है। - पानी या शीशे में परछाई न दिखना
यदि किसी व्यक्ति को पानी या दर्पण में अपनी परछाई दिखाई देना बंद हो जाए, तो यह छह महीने के भीतर मृत्यु का संकेत माना गया है। - सुगंध महसूस न होना
फूल, इत्र या किसी भी सुगंधित वस्तु की खुशबू महसूस न होना—यह एक वर्ष के भीतर मृत्यु का संकेत बताया गया है।
क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?
इन संकेतों का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है और इन्हें आस्था के आधार पर देखा जाता है। आधुनिक विज्ञान इन दावों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इनका विशेष महत्व माना गया है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित कथाओं पर आधारित है। इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। किसी भी शारीरिक या मानसिक लक्षण के लिए चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।






