महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में आयोजित राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जोरदार संदेशों के साथ किया। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाती है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी संजीवनी देती है, जिससे भूमि की उर्वरता और संरक्षण को बढ़ावा मिलता है ।
उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि आज जब जंगलों के संरक्षण और औषधीय वनस्पतियों की कमी एक चिंता का विषय बन चुकी है, तो हमें स्वावलंबी होकर औषधीय पौधों के विकास और संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । उन्होंने बताया कि हमारे खेत, रसोई बगीचे और वन क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक आयुष पौधों का संरक्षण और संवर्धन पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है ।
राष्ट्रपति ने मेले को स्वास्थ्य, आयुष और कृषि के बीच एक समग्र मंच बताते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक एक मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं, और औषधीय पौधों की खेती से न केवल कृषि में विविधता आएगी बल्कि यह रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवा को भी प्रोत्साहित करेगी ।
यह चार दिवसीय मेला आयुष मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कांग्रेस के सहयोग से 25 से 28 फरवरी तक चल रहा है, जिसमें आयुष चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने, निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ देने और किसानों को औषधीय खेती के मार्गदर्शन का अवसर प्रदान किया जाएगा ।
📌 मुख्य बातें:
- राष्ट्रपति ने औषधीय पौधों को किसानों के लिए आय का स्रोत और भूमि संरक्षण का साधन बताया ।
- उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए आयुष चिकित्सा प्रणालियों की महत्ता पर जोर दिया ।
- यह मेला पर्यावरण संतुलन, बीमारी रोकथाम और किसान कल्याण को समर्पित है।







