हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिली पीएच.डी. समतुल्य मानद उपाधि, शिक्षा जगत में हर्ष की लहर
ब्यौहारी। शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले तथा हिंदी साहित्य में गहरी रुचि एवं विशिष्ट समझ रखने वाले शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खड़हुली के प्राचार्य एवं शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ब्यौहारी में पदस्थ श्री कमलेश कुमार मिश्रा को नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में हिंदी साहित्य की प्रतिष्ठित ‘विद्यावाचस्पति’ मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह उपाधि पीएच.डी. के समतुल्य मानी जाती है।
महर्षि सत्य सनातन हिंदी विद्यापीठ, वाराणसी द्वारा नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में श्री मिश्रा को महामंडलेश्वर स्वामी निरंकारानंद जी महाराज, कुलाध्यक्ष डॉ. योगेश तरेहन, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश मिश्र, भारत के ख्यातिलब्ध संगीतज्ञ एवं तबला वादक डॉ. प्रशांत गायकवाड़ तथा कुलपति डॉ. रवि कुमार द्विवेदी के करकमलों से यह मानद उपाधि प्रदान की गई।
बाणसागर से शुरू हुआ सफर, दिल्ली में मिला सम्मान
श्री कमलेश कुमार मिश्रा की शासकीय सेवा यात्रा की शुरुआत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बाणसागर में हिंदी विषय के व्याख्याता (लेक्चरर) के पद से हुई थी। शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि जागृत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी इस विशेष उपलब्धि से उनके माता-पिता, परिवार, विद्यालय एवं ब्यौहारी क्षेत्र का नाम गौरवान्वित हुआ है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदी साहित्य के क्षेत्र में मिली यह उपलब्धि विद्यार्थियों, शिक्षकों और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है तथा इसका सकारात्मक लाभ शिक्षा जगत को प्राप्त होगा।
विद्यालय परिवार ने दी बधाई
श्री मिश्रा को मिली इस उपलब्धि पर बाणसागर विद्यालय के प्राचार्य श्री शिवेंद्र मणि त्रिपाठी और समस्त स्टाफ ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। विद्यालय परिवार ने कहा कि बाणसागर से अपने शैक्षणिक सफर की शुरुआत करने वाले श्री मिश्रा का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे विद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है।
उनकी इस उपलब्धि पर आर.डी. प्रजापति (प्राचार्य), डॉ. प्रतिभा चतुर्वेदी (प्राचार्य), डॉ. रवि कुमार द्विवेदी, डॉ. निलेश मिश्रा, राकेश मिश्रा, रमेश मिश्रा, श्री शिवेन्द्र मणि त्रिपाठी (प्राचार्य), दीप चंद्र अवधिया, राजेश कुमार कोल, सतीश तिवारी, पुनीत सिंह चंदेल सहित अनेक आत्मीय शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। श्री मिश्रा का यह सम्मान बाणसागर से ब्यौहारी तक शिक्षा और हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।






