मैहर/विंध्य सिटी न्यूज।
मैहर जिले में नेशनल हाईवे-30 बायपास से जुड़े गांवों के अंदरूनी मार्गों पर कराए जा रहे डामर सड़क निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महेदर, घुनवारा, रैगवा, अमदरा सहित अन्य गांवों में ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य महज एक से दो दिन के भीतर पूरा कर दिया गया,जिससे गुणवत्ता एवं निर्धारित मानकों के पालन को लेकर संदेह गहरा गया है।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण एजेंसी द्वारा डस्ट जैसे कचरेनुमा मटेरियल में इमल्शन मिलाकर सड़क का निर्माण किया जा रहा है,जो निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं प्रतीत होता। उनका कहना है कि इतनी कम समयावधि में सड़क निर्माण होना टिकाऊ गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सड़क की चौड़ाई कम करने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में स्वीकृत मापदंडों के अनुसार चौड़ाई नहीं रखी गई, बल्कि कम चौड़ाई बीच में एक भी मोटाई नहीं जैसी घटिया सड़क तैयार की गई है। इससे भविष्य में आवागमन,सड़क सुरक्षा एवं दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
1 से 2 इंच डामर,व साइड मिट्टी उसी स्थान की निकाल कर डाला जा रहा है जिससे रोड के किनारे गड्ढे भी हो जा रहे हैं मोटाई छिपाने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर केवल 1 से 2 इंच तक ही डामर बिछाया गया,जबकि साइड शोल्डर में नाम मात्र मिट्टी डालकर सड़क का कॉलर ढक दिया गया,ताकि गिट्टी और डामर की वास्तविक मोटाई आम लोगों को दिखाई न दे।
रात व सुबह-शाम में मशीनों से कार्य कर लीपापोती का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण का अधिकांश कार्य रात अथवा सुबह-शाम के समय मशीनों से तेजी से किया गया, जिससे यह आभास होता है कि कार्य की केवल खानापूर्ति की गई है।
इस्टीमेट और तकनीकी मानकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगाया गया, और न ही यह बताया गया कि सड़क निर्माण का स्वीकृत इस्टीमेट क्या है, डामर,गिट्टी व इमल्शन की निर्धारित मोटाई कितनी है, तथा निर्माण कार्य किस तकनीकी स्पेसिफिकेशन के आधार पर किया जा रहा है। मौके पर कोई भी विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं पाया गया।
प्रशासनिक पक्ष सामने नहीं आया
मामले को लेकर एसडीएम मैहर एवं तहसीलदार मैहर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक संपर्क नहीं हो सका, जिससे प्रशासनिक पक्ष सामने नहीं आ पाया।
कलेक्टर से जांच व समीक्षा की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि गुणवत्ता हीन निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मैहर जिला कलेक्टर महोदया से मांग की है कि—
सड़क निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता जांच कराई जाए,निर्माण कार्य की समीक्षा की जाए,तथा अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नई बनी सड़क अल्प समय में क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवाल, जिन्हें सार्वजनिक किए जाने की मांग
- NH-30 बायपास से जुड़े महेदर, घुनवारा, रैगवा, अमदरा सहित सभी गांवों में सड़क निर्माण का स्वीकृत इस्टीमेट क्या है?
- सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत चौड़ाई एवं लंबाई कितनी निर्धारित की गई थी?
- सड़क में गिट्टी, डामर एवं इमल्शन की निर्धारित मोटाई (लेयर-वाइज) कितनी है?
- क्या सड़क निर्माण एक से दो दिन में पूरा करना तकनीकी मानकों के अनुरूप है? यदि हां, तो उसका नियम/प्रावधान सार्वजनिक किया जाए।
- निर्माण कार्य की तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट (JE/AE/SDO) उपलब्ध कराई जाए।
- क्या निर्माण से पहले एवं बाद में क्वालिटी टेस्ट (CBR, कोर कट, डामर टेस्ट) कराया गया? रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- निर्माण कार्य किस ठेकेदार/एजेंसी को दिया गया है तथा कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) की प्रति उपलब्ध कराई जाए।
- सड़क निर्माण की भुगतान प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
- क्या मौके पर सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य था? यदि हां, तो क्यों नहीं लगाया गया।
- यदि निर्माण में मानक से कम गुणवत्ता पाई जाती है, तो कार्रवाई का प्रावधान क्या है?
आरोप लगाने वाले विनोद पटेल,शशि पटेल,मोहन सिंह,रामसुजान पटेल,रजनीश पटेल,रूपचंद पटेल,सुखदेव पटेल,दिनेश पटेल,अर्जुन आदिवासी,राजेन्द्र पटेल,पोड़ा पटेल,लालू पटेल,रामभुवन पटेल की मांग है प्रशासन जमीनी स्तर में जांच कर ठेकेदार पर कार्यवाही करेंl






