प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय आर.व्ही.पी.एस. महाविद्यालय उमरिया के सभागार में 27 फरवरी 2026 को लोकतांत्रिक चेतना और युवा ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार तथा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में “विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026” का जिला स्तरीय आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणा वादिनी के छायाचित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ, जिसके पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह गहरवार, श्री मनीष सिंह, निर्णायक मंडल के सदस्य श्री सुधीर सिंह (सेवानिवृत्त राज्य निदेशक), डॉ. अनिल गुप्ता, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि श्री अनिल मिश्रा, श्री टी.एस. चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त मुख्य वनसंरक्षक), माय भारत जिला उमरिया तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण से आत्मीय स्वागत किया गया।
“इमरजेंसी के 50 वर्ष : भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सबक” विषय पर ऑनलाइन पंजीकृत प्रतिभागियों ने तीन-तीन मिनट में अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवैधानिक व्यवस्था और सत्ता-संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन एवं तार्किक दृष्टिकोण रखे। पूरे आयोजन की ऑडियो एवं वीडियो रिकॉर्डिंग की गई, जिससे प्रतिभागियों के विचारों को संरक्षित किया जा सके।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. विमला मरावी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि युवा संसद केवल वाद-विवाद का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गहराई को समझने और उसकी चुनौतियों का सामना करने का अभ्यास स्थल है। उन्होंने कहा कि ‘इमरजेंसी के 50 वर्ष’ पर चर्चा युवाओं को यह सोचने का अवसर देती है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान या संस्थाओं का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक जागरूक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. ज्ञानेन्द्र गहरवार ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि युवा संसद लोकतंत्र की जीवंत प्रयोगशाला है, जहाँ विद्यार्थी असहमति को सहमति में बदलना सीखते हैं और विविध विचारों को साझा समाधान में परिवर्तित करने का अभ्यास करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी बहुलता है और युवाओं को यह समझना होगा कि विचारों की विविधता ही राष्ट्र को सशक्त बनाती है। इमरजेंसी का इतिहास हमें सतत जागरूकता, साहस और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देता है।
कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. रमेश प्रसाद ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं में संवैधानिक समझ और नागरिक अधिकारों के प्रति सजगता का विकास करते हैं, वहीं संयोजक एवं रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अरविंद शाह बरकड़े ने संचालन करते हुए युवाओं को लोकतंत्र की सच्ची शक्ति बताते हुए उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में सह-संयोजक श्री ऋषिराज पुरवार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. पी.डी. रावत, श्रीमती रानी सिंह, डॉ. सतीश वर्मा, डॉ. संध्या कुशवाहा, सुश्री रश्मि सिंह, डॉ. प्रमोद तिवारी, डॉ. सौरभ पाण्डेय, डॉ. मनीष मिश्रा, डॉ. रश्मि रानी तिवारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी सार्थक बना दिया। यह आयोजन न केवल लोकतंत्र की चुनौतियों और अवसरों पर युवाओं को चिंतन के लिए प्रेरित करता है, बल्कि उन्हें संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए भविष्य के जागरूक, जिम्मेदार और सक्षम नागरिक बनने की दिशा में भी सशक्त करता है।






