May 22, 2024

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प्रायवेट स्कूलों की खुली लूट- 3000 रुपए में मिल रहा 260 रुपए का कोर्स

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छतरपुर. प्रायवेट स्कूलों की मोटी फीस के कारण वैसे ही अभिभावकों की कमर टूट रही है, ऊपर से किताबों में भी कमीशन का खेल चल रहा है, हालात यह है कि महज 260 रुपए में मिलने वाला एनसीइआरटी का कोर्स स्कूलों की मनमानी के चलते 3000 रुपए में खरीदना पड़ रहा है, ऐसे में अच्छे स्कूल में अपने बच्चों की पढ़ाई की इच्छा रखने वाले परिजन अब हताश होते जा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। ये हाल महज कक्षा 5 वीं की किताबों में नजर आ रहे हैं, ऐसे में बड़ी कक्षाओं के कोर्स तो इससे भी महंगे आ रहे हैं।

कोरोना संकट से उबरने के बाद अब अभिभावकों को कापी किताबों की बढ़ी कीमतों का बोझ उठाना पड़ रहा है। इस बार कापी किताबें जहां 20 फीसदी तक महंगी हो गई हैं, वहीं रबर, पेंसिल और शार्पनर के दामों में भी 15 फीसदी से अधिक का इजाफा हो जाने से अभिभावकों की जेब पर भार पडऩे लगा है।

एनसीइआरटी की सभी कक्षाओं की किताबें सस्ती है जबकि सीबीएसई व आईसीएसई की निजी प्रकाशनों की किताबों पर मंहगाई इस बार और बढ़ गई है। ऐसे में किताब कापियों के दामों में बढ़ोत्तरी का असर लोगों की जेब पर दिखने लगा।
सीबीएससी बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूल सरकारी निर्देशों के बावजूद एनसीआरटी की किताबों के बजाय निजी पब्लिकेशन की किताबों को पढ़ा रहे हैं। स्कूल संचालक अपना अलग-अलग पब्लिकेशन लागू करके कमीशन वसूल रहे हैं। एक तरफ जहां निजी स्कूल अभिभावकों की जेब खाली करने में लगे हैं। वहीं केंद्रीय विद्यालय पिछले 5 सालों से सेव पेपर अभियान चला रहा है। इसके तहत विद्यार्थी अपनी पुरानी किताबें अपने से एक वर्ष जूनियर विद्यार्थी को देते हैं। इससे न केवल जरूरतमंद विद्यार्थियों को किताबों की मदद मिलती है, बल्कि नई किताबों के लिए पेपर की बचत भी होती है और अभिभावकों को भी राहत मिल जाती है।

एनसीइआरटी पब्लिकेशन का कक्षा 5वीं की किताबों का पूरा सेट मात्र 260 रुपए में आ जाता है, लेकिन निजी स्कूल इसे लागू नहीं कर रहे हैं। निजी स्कूल तो अपने पसंदीदा किताब कापी विक्रेता से कमीशन तय करके अभिभावकों को लूटने में लगे हैं। पिछले वर्ष तक महर्षि स्कूल में कक्षा 5वीं की किताबों का सेट 2100 रुपए में आ जाता था वह इस बार 2550 रुपए में मिल रहा है। पिछले साल मरियामता माता स्कूल का कोर्स 2594 रुपए में मिलता था, अब 2940 रुपए का हो गया है। क्रिश्चियन स्कूल में पढऩे वाले छात्रों के परिजन को गत वर्ष की तुलना में 2500 रुपए की बजाय इस बार 3000 से अधिक खर्च करके 5वीं की किताबें खरीदना पड़ रही हैं। कुछ निजी सीबीएससी स्कूलों में तो किताबों के दाम इससे भी अधिक हैं। इससे अभिभावकों की जेब पर महंगाई की मार बढ़ती जा रही है। इसी तरह अन्य कक्षाओं की किताबों के दाम भी बढ़ जाने से अभिभावकों की परेशानी भी बढ़ गई है।



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