May 24, 2024

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नवरात्रि में मां दुर्गा को 9 दिन लगाएं ये अलग-अलग भोग

नवरात्रि पर्व की शुरूआत हो गई है। नवरात्रि हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। नवरात्रि को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल 2022, शनिवार से शुरू होकर 11 अप्रैल 2022, सोमवार तक है।
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नवरात्रि पर्व की शुरूआत हो गई है। इस बार चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2022) 02 अप्रैल 2022, शनिवार से शुरू होकर 11 अप्रैल 2022, सोमवार तक है। नवरात्रि के दौरान शाक्ति की देवी मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। आमतौर पर नवरात्रि पर लोग पूरे नौ दिन का व्रत रखते हैं। और मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करते हैं। माना जाता है कि देवी दुर्गा ने अलग-अलग अवतार लेकर राक्षसों का अंत किया था. और भक्त उन्हें इन्हीं रूपों में पूजते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों को बहुत ही शुभ माना जाता है। वैसे तो साल भर में चार नवरात्रि पड़ती हैं लेकिन, चैत्र और शारदीय नवरात्रि को ही धूम-धाम से मनाया जाता है। माता की उपासना करने के लिए भक्त नौ दिनों तक व्रत का पालन करते हैं। कुछ लोग नौ दिनों तक अनाज, प्याज और लहसुन तक नहीं खाते। नवरात्रि के पर्व में नियम, अनुशासन और मुहूर्त का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि नियमों का पालन और विधि पूर्वक पूजा करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि नवरात्रि में पहले दिन से लेकर, अंतिम दिन तक मां भगवती को उनका मनपसंद भोग, चढ़ाने से मां अपने भक्तों पर खास कृपा बरसाती हैं। तो आइए जानते हैं किस दिन कौन सा भोग लगाया जाता है मां जगदम्बा को।

मां दुर्गा के नौ रूपों को इन चीजों का लगाएं भोग-

1. पहला दिनः मां शैलपुत्री- नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत हो जाता है और साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियां स्वत: ही प्राप्त हो जाती हैं। मां का वाहन वृषभ है। मां शैलपुत्री को गाय का घी अथवा उससे बने पदार्थों का भोग लगा सकते हैं

2. दूसरा दिनः मां ब्रह्मचारिणी- दूसरे नवरात्र में मां के ब्रह्मचारिणी एवं तपश्चारिणी रूप को पूजा जाता है। जो साधक मां के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है और जीवन में वे जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं। मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर या शक्कर से बनी चीजों का भोग चढ़ाया जाता है।

3. तीसरा दिनः मां चंद्रघंटा- मां के इस रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चन्द्र बना होने के कारण इनका नाम चन्द्रघंटा पड़ा तथा तीसरे नवरात्र में मां के इसी रूप की पूजा की जाती है तथा मां की कृपा से साधक को संसार के सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है

4. चौथा दिनः मां कुष्मांडा- अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली मां कुष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्र में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों के सभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को मां की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। मां कुष्ठमांडा को मालपूआ का भोग लगाया जाता है। 

5. पांचवां दिनः मां स्कंदमाता- पंचम नवरात्र में आदिशक्ति मां दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। मां का वाहन सिंह है । स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। 

6. छठा दिनः मां कात्यायनी- महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति मां दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्र में मां के इसी रूप की पूजा की जाती है। मां की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। माना जाता है कि मां कात्यायनी को शहद और मीठे पान का भोग अति प्रिय है। 

7. सातवाँ दिनः मां कालरात्रि ~ सभी राक्षसों के लिए कालरूप बनकर आई मां दुर्गा के इस रूप की पूजा सातवें नवरात्र में की जाती है। मां के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के भूत, पिशाच एवं भय समाप्त हो जाते हैं। मां की कृपा से भानूचक्र जागृत होता है मां को गुड़ का भोग अति प्रिय है।

8. आठवां दिनः मां महागौरी- आदिशक्ति मां दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा आठवें नवरात्र में की जाती है। मां ने काली रूप में आने के पश्चात घोर तपस्या की और पुन: गौर वर्ण पाया और महागौरी कहलाई। मां का वाहन बैल है तथा मां को हलवे का भोग लगाया जाता है । मां की कृपा से साधक के सभी कष्ट मिट जाते हैं और उसे आर्थिक लाभ भी मिलता है। मां को हलवे व नारियल का भोग लगाया जाता है।

9. नवां दिनः मां सिद्धिदात्री- नौवें नवरात्र में मां के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है मां का यह रूप साधक को सभी प्रकार की ऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। जिस पर मां की कृपा हो जाती है उसके लिए जीवन में कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता। मां को खीर अति प्रिय है अत: मां सिद्धिदात्री को खीर, हलवा पूरी का भोग लगाया जाता है



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