March 1, 2024

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इनकम टैक्स, TDS , एवं ITR फाईल करने की पूरी जानकारी

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इनकम टैक्स : इनकम टैक्स व्यक्ति या संस्थाओं (Tax Payers) पर लगाए जाने वाला टैक्स होता है, जो की हर व्यक्ति की अपनी आय या मुनाफे (Taxable Income) के अनुसार भिन्न होता है। कई न्यायालय इनकम टैक्स को कंपनी टैक्स या व्यवसायिक संस्थाओं पर कॉर्पोरेट टैक्स के रूप में कहते हैं। पार्टनरशिप आम तौर पर टैक्स नहीं होती है, यह पार्टनर्स अपनी अपनी पार्टनरशिप के हिस्से पर टैक्स देते हैं। एक देश और उपखण्ड दोनों के द्वारा टैक्स  लगाया जा सकता है। 

इनकम टैक्स (income tax)को आम तौर पर टैक्स दर के समय के टैक्स योग्य इनकम के उत्पाद के रूप में गिना जाता है। टैक्स की दर टैक्स योग्य इनकम में वृद्धि के रूप में बढ़ सकती है (स्नातक या प्रगतिशील दरों के रूप में संदर्भित) टैक्सेशन की दरें टैक्सपेयर के प्रकार या विशेषताओं के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पूंजीगत लाभ को अन्य इनकम की तुलना में अलग दरों पर लगाया जा सकता है।

विभिन्न प्रकार के क्रेडिट के टैक्स को कम करने की अनुमति दी जा सकती है। कुछ न्याय-क्षेत्र इनकम टैक्स के उच्चतर या वैकल्पिक आधार या इनकम के माप पर टैक्स लगाते हैं। अधिकार क्षेत्र में निवासी टैक्सपेयर की टैक्स योग्य इनकम आम तौर पर टोटल इनकम, उत्पादन खर्च और अन्य कटौती है, बिक्री के लिए रखे सामान सहित संपत्ति की बिक्री से केवल शुद्ध लाभ इनकम में शामिल है। निगम के शेयरधारकों की आय में आमतौर पर निगम से मुनाफे का वितरण शामिल होता है। कटौती आम तौर पर व्यापारिक संपत्तियों की लागतों की वसूली के लिए एक भत्ता सहित सभी आय उत्पादन या व्यावसायिक खर्च शामिल हैं।

TDS या स्रोत पर कर कटौती क्या है?

स्रोत पर कर कटौती या टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्सेज) से आपका पाला कई बार पड़ा होगा. क्या आप जानते हैं इसका मतलब? यह क्यों लगाया जाता है? कितनी आय पर लगता है?

टैक्स के रूप में काटी गई यह रकम कहां जाती है ? कौन काट सकता है टीडीएस? हमने यहां इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश की है.

टीडीएस शुरू करने का मकसद था स्रोत पर ही टैक्स काट लेना. अगर किसी व्यक्ति को कोई आय होती है तो उस आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाये तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं.

सरकार टीडीएस (TDS)के जरिये टैक्स जुटाती है. टीडीएस विभिन्न तरह के आय़ स्रोतों पर काटा जाता है मसलन सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि पर.

टीडीएस (TDS) हर आय पर और हर किसी लेन-देन पर लागू नहीं होता है. आयकर विभाग की ओर से कई तरह के अलग-अलग पेमेंट्स पर अलग-अलग रेट्स सुझाव गए हैं.

उदाहरण के तौर पर अगर आप भारतीय हैं और आपने डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया तो इस पर जो आय प्राप्त हुई उस पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं चुकाना होगा लेकिन अगर आप एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) हैं तो इस फंड से हुई आय पर आपको टीडीएस (TDS) देना होगा.

जो व्यक्ति पेमेंट कर रहा है वह टीडीएस (TDS) भरने के लिए उत्तरदायी है और सरकार के खाते में जमा करना जरूरी है. इन्हें डिडक्टर कहा जाता है. वहीं दूसरी ओर जो व्यक्ति टैक्स काट के भुगतान प्राप्त करता है उन्हें डिडक्टी कहा जाता है.

फार्म 26AS एक टैक्स स्टेटमेंट है जिसमें यह दिखाया जाता है कि काटा गया टैक्स और व्यक्ति के नाम या पैन में जमा किया गया है. हर डिडक्टर को टीडीएस (TDS) सर्टिफिकेट जारी करके ये बताना भी जरूरी है कि उसने कितना टीडीएस काटा और सरकार को जमा किया।

कैसे काटा जाता है टीडीएस?

कोई भी संस्थान (जो टीडीएस (TDS )के दायरे में आता है) जो भुगतान कर रहा है, वह एक निश्चित रकम टीडीएस (TDS)के रूप में काटता है. जिसकी आय से टैक्स काटा गया है वह भी टीडीएस (TDS) कटने का सर्टिफिकेट प्राप्त करने का अधिकार रखता है.

डिडक्टी अपने चुकाए गए टैक्स का टीडीएस (TDS) क्लेम कर सकता है. हालांकि उसी वित्तीय वर्ष में क्लेम करना पडेगा.

टैक्स डिडक्टर की यह जिम्मेदारी है कि वह टीडीएस (TDS) सरकार को जमा करे. जब एक बार राशि सरकार के खाते में जमा हो जाती है तो यह राशि उस व्यक्ति के फार्म 26AS में दिखती है।

ये हैं टीडीएस रेट्स

आयकर कानून के मुताबिक टीडीएस (TDS) के विभिन्न रेट हैं , यह भुगतान की प्रकृति पर निर्भर करता है. यहां कुछ आय पर टीडीएस (TDS) रेट दिये गए हैं.

 (स्रोत -आयकर विभाग की वेबसाइट)

एक निश्चित आय पर कटता है टीडीएस (TDS)

एक बात ध्यान रखें कि एक निश्चित स्तर से ज्यादा भुगतान पर ही टीडीएस (TDS) कटता है. अगर निश्चित रकम से ज्यादा भुगतान नही है तो टीडीएस (TDS) नहीं कटता है.

विभिन्न तरह की आय सीमा पर टीडीएस कटता है आयकर विभाग ने सैलरी, ब्याज आदि पर टीडीएस (TDS) काटने के कुछ नियम तय किये हैं जैसे कि एक साल में एफडी से अगर 10 हजार से कम ब्याज मिलता है तो आपको उसपर टीडीएस (TDS) नहीं चुकाना पड़ेगा.

टीडीएस से कैसे बचें?

अगर एक वित्तीय वर्ष में व्यक्ति की आय इनकम टैक्स छूट की सीमा से नीचे है तो वह अपने नियोक्ता से टीडीएस (TDS) फार्म 15 G/15H भरके टीडीएस (TDS) नहीं काटने के लिए कह सकता है.

आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन दो महीना बढ़ी

आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने वालों के लिए अच्छी खबर है. देश में टैक्स मामलों की सबसे बड़ी संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा (डेडलाइन) 30 नवम्‍बर 2020 तक बढ़ा दी है.

इससे पहले प्रत्‍येक वर्ष आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई रहती है।

आयकर रिटर्न फाइल करने की ऐसे करें तैयारी

इस साल आयकर रिटर्न दाखिल करने का वक्त करीब आ गया है. क्या आपने अपनी तैयारी पूरी कर ली है? अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने जा रहे हैं तो सबसे पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आपको किस आईटीआर फॉर्म में रिटर्न फाइल करना है ।

आयकर विभाग ने इस साल से आईटीआर के सभी फॉर्म रिवाइज कर दिए हैं। अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) के लिए गलत फॉर्म चुनते हैं तो आपके आईटीआर को डिफेक्टिव (गलत) माना जायेगा और आपको आईटीआर दोबारा फाइल करना पड़ेगा।

आईटीआर फॉर्म-1 या सहज

सैलरी पाने वाले ज्यादातर लोग इसी फॉर्म ITR-1 (आईटीआर-1) की मदद से इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं. इसके लिए फॉर्म 16 जरूरी है. इसमें आपको वेतन से आमदनी के बारे में जानकारी मिलती है.आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म आयकर विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

यह वेतन से आमदनी, एक मकान से आमदनी और ब्याज आदि से आय पर लागू होता है. यह 50 लाख रुपये से कम सालाना आमदनी वाले लोगों के लिए है। यह देश के आम निवासियों के लिए बहुत आसान फॉर्म है।

इसके लिए कुछ शर्त इस तरह हैं:

a) निवासी भारतीय (असामान्य निवासी के अलावा सभी)

b)वित्त वर्ष 2017-18 में आमदनी 50 लाख रुपये से अधिक नहीं हो.

c) आमदनी का स्रोत इनमें से ही कोई एक या अधिक हो

  1. वेतन से आमदनी
  2. सिर्फ हाउस प्रॉपर्टी से आमदनी और/या

आईटीआर फाइल करने के लिए क्या हैं जरूरी दस्तावेज?

इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने से पहले आपको यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि इस वर्ष में आपने किन-किन स्रोत से कमाई की है. अगर आपने आईटीआर में सभी आमदनी की जानकारी नहीं दी, तो आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस मिल सकता है। इसके बाद आपको टैक्स के साथ जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है।

आईटीआर-1 फाइल करने से पहले आपको इन दस्तावेज की व्यवस्था कर लेनी चाहिए.

दस्तावेजों की सूची

a) आईटीआर फाइल करने के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज है पैन कार्ड.

इसके बिना आप आईटीआर फाइल नहीं कर सकते. इनकम टैक्स विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर रजिस्टर करते वक्त ही आपको पैन नंबर की जरूरत पड़ेगी.

b) इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए अब आधार भी जरूरी दस्तावेज बन गया है.

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले आपका आधार पैन नंबर से जुड़ा होना चाहिए.

c) फॉर्म -16/सैलरी स्लिप

d) वित्त वर्ष में सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपाजिट, रेकरिंग डिपाजिट आदि से कमाए गए ब्याज के रकम की जानकारी.

इसके लिए जरूरी है कि आपके बैंक/पोस्ट ऑफिस पासबुक को अपडेट करा लिया गया हो। इससे आपको अपने खाते में मिले ब्याज के बारे में सही जानकारी मिलेगी।

e) अगर आपने अपना घर किराये पर दिया है तो किराये से आमदनी की कुल रकम

f) इसी वित्त वर्ष में नगर निगम को चुकाए गए टैक्स की रकम

g) वित्त-वर्ष में किये गए बैंकिंग ट्रांजेक्शन का विवरण.

इसके लिए आपका अपडेटेड पासबुक जरूरी है. इसके साथ ही आपको उस बैंक अकाउंट का सही IFSC कोड भी लिखना जरूरी है जिसमें आप इनकम टैक्स रिफंड चाहते हैं.

h) वित्त वर्ष में काटे गए टीडीएस की कॉपी.

यह सुनिश्चित करें कि टैक्स काटने वाले ने आपको सभी सर्टिफिकेट दे दिया हो. अगर आपने कोई एडवांस टैक्स (अग्रिम कर) चुकाया है तो उसका भी चालान रसीद आपके पास होना चाहिए.

i) फॉर्म 26 एएस

फॉर्म 26 एएस आपका समेकित वार्षिक टैक्स विवरण है. यह आपकी टैक्स पासबुक की तरह है। इसमें आपके पैन पर जमा किए गए सभी टैक्स की जानकारी सरकार के पास होती है. इसमें निम्न चीजें शामिल हैं :

-आपके नियोक्ता की ओर से काटा गया टीडीएस

-बैंकों की ओर से काटा गया टीडीएस, अगर वित्त वर्ष में ब्याज आय 10,000 रुपये से ज्यादा है

-आपको किए गए भुगतान के लिए किसी अन्य संस्थान की ओर से काटा गया टीडीएस

-वित्त वर्ष के दौरान अपने आप जमा किए गए एडवांस टैक्स

-आपकी ओर से चुकाए गए सेल्फ असेसमेंट टैक्स

j) सेक्शन 80डी से 80यू के तहत डिडक्शन

सेक्शन 80सी के तहत टैक्स सेविंग विकल्पों के अलावा कुछ ऐसे खर्च हैं, जिन पर आप आयकर अधिनियम के विभिन्न सेक्शन के तहत कर कटौती का दावा कर सकते हैं. उदाहरण के लिए वित्त वर्ष में स्वास्थ्य बीमा के चुकाए गए प्रीमियम पर सेक्शन 80 डी के तहत डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं. इसमें अधिकतम 25,000 रुपये तक डिडक्शन का लाभ मिलता है.

k)  इनकम टैक्स का कम्प्यूटेशन

ऑनलाइन आईटीआर फाइल करने से पहले आपको समय से इनकम टैक्स की गणना कर लेनी चाहिए। इससे फायदा यह होगा कि आप वेतन से आमदनी और हाउस प्रॉपर्टी से आमदनी का सही ब्रेकअप ऑनलाइन आईटीआर में आसानी से डाल सकेंगे.

एक बार सभी जरूरी दस्तावेज जुटा लेने और गणना कर लेने के बाद आप इनकम टैक्स विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट से ऑनलाइन आईटीआर फाइल कर सकते हैं। अगर आप टैक्स देनदारी के दायरे में आते हैं और इस वक्त तक आईटीआर फाइल नहीं करते तो आप पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

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