July 18, 2024

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बैकफुट पर क्यों आई शिवराज सरकार: विवाद बढ़ा तो मजबूरी में टालने पड़े पंचायत चुनाव

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पंचायत चुनाव पर शिवराज सरकार बैकफुट पर आ गई है। इसकी शुरुआत एक माह पहले हो गई थी, जब शिवराज सरकार ने पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार में हुए परिसीमन को रद्द करने और नए रोटेशन के बिना 2014 के आरक्षण से चुनाव कराने का अध्यादेश जारी किया था। कांग्रेस इसे कोर्ट में चुनौती देगी? सरकार को पता था कि इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह उम्मीद नहीं थी कि सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण को लेकर नई मुसीबत खड़ी हो जाएगी। नतीजा, पंचायत चुनाव टालने का निर्णय लेना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को ओबीसी के लिए रिजर्व सीटों को सामान्य घोषित करने का आदेश दिया था। तब सरकार को फटकार भी लगाई थी। कोर्ट ने कहा था- आग से मत खेलिए। कानून के दायरे में रहकर चुनाव करवाइए। सरकार और बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस पर आरोप लगा दिया था। इसके बाद मामला न्यायालयीन और सरकारी होने के साथ ही राजनीतिक हो गया था। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कांग्रेस से राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा पर हमला भी किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने के खिलाफ है।

राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद सरकार ने कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया। बीजेपी की तरफ से कहा जाने लगा कि कांग्रेस नहीं चाहती है कि ओबीसी को आरक्षण मिले। कांग्रेस की वजह से ही ओबीसी का हक मारा गया है। इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा कि हमने रोटेशन प्रणाली पर सवाल उठाया था। ओबीसी आरक्षण के पक्ष में राज्य सरकार अपना पक्ष सही से नहीं रख पाई है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने बीते दिनों तीन चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया था। पहले और दूसरे चरण के लिए नामांकन भी हो गए थे। इसी बीच, ओबीसी आरक्षण में रोटेशन प्रणाली को लेकर पेंच फंस गया था। कई लोगों ने कोर्ट में याचिका लगाकर चुनाव रद्द करने की मांग की थी। कांग्रेस नेता विवेक तन्खा कोर्ट में पैरवी कर रहे थे। एमपी हाईकोर्ट ने चुनाव पर रोक लगाने से इनकार किए जाने बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

विधानसभा में भी बवाल
विधानसभा का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर से शुरू हुआ। सत्र के दौरान ओबीसी आरक्षण को लेकर हंगामा हुआ। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रही थी। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार कुछ नहीं कर रही है। एक तरफ चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। दूसरी ओर कोर्ट में जाने की बात कही जा रही है। नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि हम चाहते हैं चुनाव को तत्काल रोका जाए।

अपनों के निशाने पर शिवराज सरकार
ओबीसी आरक्षण विवाद को लेकर शिवराज सरकार असहज हो गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इसे लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रह्लाद पटेल तक ने इशारों-इशारों में निशाना साधा है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया पर लिखा था- बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव नहीं होना चाहिए। इसे लेकर उन्होंने शिवराज से बात की थी। इसके बाद प्रहलाद पटेल ने कहा कि पिछड़ों को आग में ना झोंकें तो अच्छा होगा। साथ ही, जरूरी कदम नहीं उठाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। ऐसे में शिवराज सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं।

प्रदेश में सबसे ज्यादा ओबीसी की आबादी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद इसी वर्ग से आते हैं। आरक्षण के मुद्दे पर शिवराज सरकार किसी भी कीमत पर इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहता है। अंत में सरकार ने कैबिनेट की बैठक में पंचायत चुनाव को टालने का फैसला किया है।



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