July 18, 2024

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शिक्षा के अधिकार के लिए तरसते आदिवासी बच्चे शासन प्रशासन बना मूकदर्शक

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शहडोल गोहपारू/जयसिंहनगर शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत जीरो से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का प्रावधान है । प्रशासन ने बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण करा दिए परंतु शिक्षक उपलब्ध ना होने के चलते आदिवासी क्षेत्र के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं| जबकि ग्रामीणों के विकास की आधारशिला शिक्षा पर ही निर्भर है।

पिछले सत्र में छात्रों ने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा और प्रशासन ऑनलाइन शिक्षा का ढिंढोरा पीट रहा था| वनांचल सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में अभिभावकों के पास स्मार्टफोन तो दूर वहां किसी दूरसंचार कंपनी का टावर ही नहीं है| और पिछले वर्ष कोरोनावायरस के समय सभी बच्चों को कक्षा उन्नति कैसे हो? गई जबकि वर्तमान सत्र में ब्रिज कोर्स के जरिए छात्रों को पिछली कक्षा के पाठ पढ़ाए जा रहे हैं|

इसी तरह संकुल केंद्र चुहिरी में 8 माध्यमिक विद्यालय हैं 6 माध्यमिक विद्यालय में 1 शिक्षक और दो माध्यमिक विद्यालय कुदरी और बेलिया शिक्षक विहीन हैं| माध्यमिक विद्यालय में 3 कक्षाएं संचालित होती हैं एक शिक्षक 3 कक्षा के छात्रों को कैसे पढ़ा सकता है| जबकि ब्रिज कोर्स के साथ पाठ्यक्रम भी पूरा करना है क्या यह संभव है?

माध्यमिक विद्यालय कुद्री और माध्यमिक विद्यालय महुआ टोला में एक भी अतिथि शिक्षक नहीं है| 6 माध्यमिक विद्यालय मैं 1-1 अतिथि शिक्षक है| सभी रेगुलर शिक्षक को प्रधानाध्यापक और बीएलओ का प्रभार दिया गया है 2-3 रेगुलर शिक्षकों को 2-2 स्कूलों का प्रभारी बनाया गया है| और साथ में स्कूल के अन्य कार्य चुनाव ड्यूटी आदि में भी इन लोगों की ड्यूटी लगाई जा रही है| अतिथि शिक्षक वर्ग 2 को मात्र पीरियड के हिसाब से अधिकतम 7000 मिलते हैं ऐसी स्थिति में इतनी दूर वनांचल में अगर अतिथि शिक्षक पढ़ाने जाते हैं तो इतने पैसों से ज्यादा का पेट्रोल खत्म हो जाता है और अतिथि शिक्षक के भविष्य के प्रति सरकार उदासीन है इसलिए यहां गणित और अंग्रेजी के अतिथि शिक्षक पढ़ाने के लिए नहीं मिलते ऐसी स्थिति लगभग पूरे ब्लॉक और जिले की भी है।

बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षक उपलब्ध न करवाने पर किस को सजा मिलनी चाहिए? शिक्षा विभाग के बड़े आला अधिकारी बाबू और शिक्षक के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में अध्ययन करते होंगे मगर जिन आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है उन जिम्मेदार अधिकारियों को कौन माफ कर रहा है?

कई शिक्षक ऐसे भी है जो न तो समय पर स्कूल जाते और न ही स्कूल में पूरा समय दे पाते। जिस कारण बच्चे अपनी शिक्षा पर ध्यान नहीं लगा पाते। क्या ऐसे शिक्षकों को दंडित किया जाना चाहिए? ऐसा ही मामला जैसिंहनगर ब्लॉक के स्कूल का है, जहां पर शिक्षक समय पर आते और न ही छात्रों की गुणवत्ता पर ध्यान देते जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में है।

खंड शिक्षा जयसिंहनगर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मीठी के अंतर्गत विद्यालय शासकीय हाई स्कूल शासकीय प्राथमिक स्कूल शासकीय माध्यमिक स्कूल सुबह के 11:00 बजे तक नहीं खुलता स्कूल सड़क से लगा हुआ बच्चे समय 10:00 बजे से आ जाते हैं और रास्ते में खड़े रहते हैं मास्टर मनमानी तरीके से 11:00 से 11:30 स्कूल आते हैं मास्टर से गांव के लोगों के द्वारा पूछा गया कि सर आप स्कूल 11:00 बजे क्यों आते हैं तो मास्टर शराब पिए हुए पूछता है कि आप सरकारी स्कूल में बिना कलेक्टर के परमिशन के कैसे अंदर आ गए। स्कूल के अध्यक्ष मोहम्मद गुलशेर खान और ग्रामीण अभिभावक मास्टर के 11:30 बजे स्कूल खोलते समय उपस्थित रहे।



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