March 1, 2024

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आंधी के साथ होगी भारी बारिश, कई जिलों में आ सकती है आफत

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भोपाल: मध्यप्रदेश: पिछले कुछ दिनों से बारिश और ओलावृष्टि से कई जिले परेशान हुए हैं। इस बीच मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 9 मई से 12 मई के बीच एक बार बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इससे फसलों को एक बार फिर नुकसान पहुंच सकता है। फिलहाल अगले 24 घंटों के दौरान तेज हवा के साथ कई जिलों में बारिश का भी पूर्वानुमान जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी और कुछ जिलों में आंधी चलेगी और ओलावृष्टि के बीच अब आंधी तूफान का खतरा उत्पन्न हो गया है।

मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक 9 मई से 11 मई के दौरान मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इसके साथ ही अगले 24 घंटों के दौरान रीवा, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडोरी, बालाघाट, दमोह, सागर, छतरपुर, रायसेन और सीहोर जिले में कहीं-कहीं बारिश होगी या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। साथ ही ओलावृष्टि के भी आसार हैं।

यहां चलेगी तेज आंधी मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी कर कहा है कि प्रदेश के रीवा, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडोरी, बालाघाट, रायसेन और सीहोर जिले में कहीं-कहीं तेज हवा चलेगी और गरज-चमक के साथ आंधी चलेगी। हवा की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हो सकती है।

पिछले 24 घंटों का हाल मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान रीवा, सागर और शहडोल संभागों के जिलों में अनेक स्तानों पर, जबलपुर, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन एवं भोपाल संभागों के जिलों में कहीं-कहीं बारिश दर्ज की गई। शेष संभागों के जिलों का मौसम शुष्क रहा।

मई के शुरुआत में प्रदेश के तापमान में उछाल आया है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में तापमान बढ़ गया है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 45 डिग्री खरगौन में दर्ज किया गया है।

मौसम के ताजा हालात -मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र नायक के मुताबिक औसत समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर ऊपर अपनी धुरी के साथ एक द्रोणिका रूप में पश्चिमी विच्छोभ मोटे तौर पर 72 डिग्री पूर्वी देशांतर के साथ अक्षांश 33 डिग्री उत्तरी अक्षांश के उत्तर में चलायमान है। अंडमान सागर और इससे सटे दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी में स्थित कम दबाव का क्षेत्र एवं इससे संबंधित चक्रवाती परिसंचरण मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तरों तक फैला हुआ है। अगले 5 दिनों के दौरान इस कम दबाव का क्षेत्र के दक्षिण अंडमान सागर और सटे हुये दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी से में बने रहने की बहुत संभावना है।


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