March 3, 2024

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इंसान थोड़े हो

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क्या हुआ , परेशां कहे हो , गधे हो , इंसान थोड़े हो !
आज थाली , कल ताली , फिर दिया भी जलाये हो ,
मदारी के बंदर हो , इंसान थोड़े हो!

अभी तो शुरुआत है शांत कहे हो ,
चलो अपनी डीह पर ,
बैल हो इंसान थोड़े हो !
कोई पागल , कोई मंद बुद्धि बताता ह ,
अनपढ़ हो बुद्धि हीन थोड़े हो ,!

कभी चाइना , को आईना ,कभी अमेरिका को महान बताते हो ,
विदूषक हो चौकीदार थोड़े हो !

कोई भी आकर , हाक केर लेजाए ,
जानवर हो जनता थोड़े हो !
ये पप्पू वो चोर कभी तो ध्यान से देखो ,
मुखौटे हो , नेता थोड़े हो !

देश हित समाज हित, हम क्या जाने ,
साधु हो इंसान थोड़े हो !

कवि अतुल तिवारी


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