March 1, 2024

VINDHYA CITY NEWS

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यदि आप राशन कार्ड बनवाना चाहते हैं, तो ऑनलाइन राशन कार्ड का फॉर्म भरा जा सकता है….. देखें पूरी खबर

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यदि आप राशन कार्ड बनवाना चाहते हैं तों यह खबर आपके लिए है, अब आप राशन कार्ड घर बैठे भी, अपने राशन कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

पिछले वर्ष वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वन नेशन वन कार्ड (ONORC) की स्कीम लॉन्च को थी। ये वो स्कीम थी जिसमें राशन कार्ड से जुड़े नए नियम लागू होने थे। जिनके पास राशन कार्ड नहीं थे उन्हें राशन कार्ड बनाने के लिए नया सिस्टम भी लागू किया गया था और साथ ही साथ गरीबी रेखा से नीचे वालों को दो महीने का फ्री राशन देने की बात भी की गई थी। 

यह स्कीम को अभी कुछ राज्यों ने नहीं अपनाया है, लेकिन कई राज्य अब इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सिस्टम के तहत आप राशन कार्ड का फॉर्म ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है। इससे बार-बार ऑफिस जाने की परेशानी खत्म हो जाएगी। 

राशन कार्ड के कौन कर सकता हैं अप्लाई?

इस स्कीम से कोई भी व्‍यक्ति जो भारत का नागरिक  हो, और उसकी आयु 18 साल से ऊपर हो वो राशन कार्ड के लिए अप्लाई कर सकता है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों का नाम माता-पिता के नाम के साथ जुड़ा होता है। 

राशन कार्ड- कितने तरह के होते हैं

  • बीपीएल – गरीबी रेखा के नीचे वाला राशन कार्ड
  • नॉन- बीपीएल- गरीबी रेखा के ऊपर वाला राशन कार्ड
  • अंत्योदय- जिनकी स्थाई आय नहीं रहती है उनके लिए राशन कार्ड

इसके अलावा, बीपीएल राशन कार्ड में नीला, पीला, हरा, लाल आदि रंग होते हैं जिसमें खाना, ईंधन और अन्य सामान के लिए राशन कार्ड दिया जाता है। 

कैसे डाउनलोड करें राशन कार्ड ऑनलाइन फॉर्म-

फूड एंड सिविल सप्लाई डिपार्टमेंट (म.प्र.) का फार्म डाउनलोड करें

ऑनलाइन राशन कार्ड अप्लाई करने से पहले आपको ये ध्यान रखना होगा कि हर राज्य का अलग राशन कार्ड डिपार्टमेंट है और ऑनलाइन लिंक भी अलग होगा। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश, हिमाचल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आप जिस भी राज्य में रहते हैं उस राज्य के लिंक पर क्लिक करना होगा। 

सबसे पहला आपको अपने राज्य के फूड एंड सिविल सप्लाई डिपार्टमेंट लिंक पर क्लिक करना होगा। इसे आप गूगल पर सर्च कर सकते हैं।

इसके बाद जब होम पेज आ जाए तो आपको “Download Forms” पर क्लिक करना होगा।

यहां से आपको ड्रॉप डाउन लिस्ट मिलेगी जिसमें से एक “Application Forms” होगा। यहां आपको ध्यान इस बात का रखना है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों के अलग फॉर्म्स होते हैं। अपने इलाके के हिसाब से ही इन्हें भरें।

अब आपको सभी डिटेल्स भरनी होंगी।

इसके बाद आप दो ऑप्शन चुन सकते हैं पहला ये कि इसका प्रिंट आउट निकाल कर सभी डॉक्युमेंट्स के साथ तहसील ऑफिस में जमा कर दें।  नोट: इसके अलावा आपको ये ध्यान रखना होगा कि हर राज्य का राशन कार्ड कुछ अलग नियमों का पालन करता है और साथ-साथ उनके प्रोसेस भी थोड़े अलग हैं। जैसे कुछ राज्यों में भले ही आप राशन कार्ड ऑनलाइन अप्लाई कर दें, लेकिन आपको एक बार तो तहसील ऑफिस जाना ही होगा। ये आपके राज्य पर निर्भर करता है कि उसके नियम कैसे होंगे। इससे फायदा ये है कि बार-बार चक्कर लगाने का झंझट बच जाएगा।  

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    विशाल कलश शोभायात्रा के साथ कथा प्रारंभ शोभायात्रा में शामिल हुए मां ज्वाला धाम शक्तिपीठ उचेहरा के प्रधान पुजारी

    विशाल कलश शोभायात्रा के साथ कथा प्रारंभ शोभायात्रा में शामिल हुए मां ज्वाला धाम शक्तिपीठ उचेहरा के प्रधान पुजारी

    नौरोजाबाद_उमरिया जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत महुरा में आज दिनांक २६/०१/२०२३ दिन गुरुवार को राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस व बसन्त पंचमी के पावन अवसर पर श्री मद भागवत पुराण कथा कलश यात्रा के साथ कथा प्रारंभ हुई। कलस शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए शोभा यात्रा इतनी सुंदर व्यवस्थित तरीके से हर गली मुहल्ले से निकली। तो लोग अपने मोबाईल कैमरे में शोभायात्रा की तस्वीर वीडियो में कैद करते गए शोभा यात्रा में लहराते ध्वजा पताखा के बाद बैंड बाजा में नाचते भक्तजन उसके क्रम बाद रथ पर सवार कथा वाचिका पीछे सैकड़ो की तादात में भक्ति भाव से विभोर महिलाओ ने अपने सर में रखे कलश गाते हुए गीत और सबसे पीछे चल रहे भक्तो का हुजूम जय श्री राम के लगाते जयकारों से पूरा ग्राम जय घोष हो रहा था हर गली मुहल्ले में अपने अपने आवास के सामने लोग गोबर से गलियों को लीप कर द्वार के सामने कलश जलाकर शोभायात्रा की आगवानी की।शोभायात्रा में मां ज्वाला धाम शक्तिपीठ उचेहरा के संस्थापक प्रधान पुजारी जी समेत महाराणा प्रताप क्षत्रिय महासभा जिला उमरिया के नवीन अध्यक्ष श्री कृष्णकुमार सिंह राजपूत जी, व पूर्व अध्यक्ष भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री इंद्रपाल सिंह इटौरिहा जी, श्री चंद्रभान सिंह जी, श्री जगतपाल सिंह राणावत जी, श्री नंदकुमार सिंह जी, श्री मूरतध्वज सिंह जी, श्री मदन सोनी जी, श्री सुनील सिंह जी, श्री खेलावन सिंह जी, श्री धनीराम सिंह जी, श्री पुहुप सिंह राजपूत जी, सहित ग्राम के सैंकड़ों गणमान्य नागरिक महिलाएं छोटे बच्चे बच्चियों सहित, पण्डित पुरोहित शामिल हुए।शोभायात्रा पूरे ग्राम भ्रमण करते हुए कथा पंडाल पंहुचकर आचार्य श्री आनन्द कृष्ण शास्त्री जी द्वारा व्यास पूजन कराया गया। तत्पाचात कथा वाचिका परम् पूज्य “सोनम मिश्रा जी” व्यास पीठ पर विराजमान होकर भगवान की आरती पूजा अर्चना कर कथा प्रारंभ की कथा वाचक परम् पूज्य सोनम मिश्रा जी द्वारा प्रथम दिन की कथा में कहा कि लोगों के लाखों जन्मों के अच्छे कर्म किए होंगे तब जाकर आज श्री मद भागवत पुराण कथा कराने व सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है लोंगो को कथा श्रवण करने से पापो की गठरी (पेड़ को जड़ समेत उखाड़ने से पेड़ नष्ट हो जाता है) से मुक्त हो जाता है और ईश्वर के धाम को प्राप्त करता है भागवत पुराण कथा से नारद मुनि श्रापित होते हुए भी सात दिनों के लिए श्राप मुक्ति हुए थे और कथा श्रवण किए थे। कथा गंगा के समान डुबकी लगाने लोग इस संसार के मायाजाल से मुक्ति की प्राप्ति होती है कथा वाचक परम् पूज्य सोनम मिश्रा जी द्वारा व्यास पीठ से मां ज्वाला धाम शक्तिपीठ उचेहरा के संस्थापक प्रधान पुजारी जी को, और क्षत्रिय महासभा उमरिया जिले के नव नियुक्त अध्यक्ष श्री कृष्णकुमार सिंह राजपूत जी को व्यास मंच में बुलाकर दोनो का स्वागत वंदन करते हुए महाराणा क्षत्रिय महासभा द्वारा आयोजित श्री मद भागवत कथा के आयोजक मंडल को भी अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हुए अच्छे कार्यक्रम हेतु तारीफ की कि आयोजक मंडल द्वारा बहुत सुंदर शोभायात्रा निकाली गई और सुव्यवस्थित पंडाल में स्त्री पुरुषों के बैठने की व्यवस्था हेतु सादर साधुवाद। सभी श्रोता गण प्रथम दिवस की पूरी कथा श्रवण कर आरती में शामिल हुए। कथा बहुत सुंदर लगी क्यों कि कथा वाचक परम् पूज्य सोनम मिश्रा जी द्वारा बहुत सुंदर तरीके से कथा को दो भागों में (रामायण और महाभारत,) दो रसो से श्रवण कराया जाता है जो कि उनके एक एक शब्द श्रवणकर्ता को समझ में आता है।
    जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏🙏

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    सामाजिक एकता व समरसता के वाहक थे संत शिरोमणि श्री रविदास जी महाराज–दिलीप पाण्डेय

    आयुष विभाग के स्वास्थ्य मेले का हुआ पाली नगर में भव्य शुभारंभ

    संत शिरोमणि श्री रविदास जी महाराज के प्रागट्य दिवस के परम पवित्र मौके पर पाली नगर में आयुष चिकित्सा हेतु शिविर लगाया गया जिसमें जिला अध्यक्ष श्री दिलीप पाण्डेय जी की गरिमामई उपस्थिति रही साथ में श्री अजुर्न सिंह जी, नगर पालिका अध्यक्ष शकुंतला प्रधान जी,प्रकाश पालीवाल जी सहित भाजपा के पदाधिकारी वा नगर के गड़मान्य जनो ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की lआयुष चिकित्सा शिविर में जिले के आयुष चिकित्सको के द्वारा आयुष के महत्व को बताया गया साथ ही कैम्प में आये मरीजों का निशुल्क उपचार भी किया गया संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त समस्याओं,अलगाव के विरुद्ध कार्य किया और लोगों को एकत्व वा धर्म से जोड़ा।उनके लाखों भक्त मुसलमान बन जाएंगे ऐसा सोचकर इन पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया गया लेकिन संत रविदास जी ने इस्लाम नहीं अपनाया। अपितु जो सदना पीर इनको मुसलमान बनाने आया था वो इनकी ईश्वर-भक्ति और आध्यत्मिक-साधना से प्रभावित होकर हिन्दू होकर रामदास नाम से उनका शिष्य बन गया।संत श्री रविदास जी महाराज बचपन से ही साधु संतो की संगति में पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। वे जूते बनाने का काम किया करते थे और अपना काम पूरी लगन तथा परिश्रम से करते थे और समय से काम को पूरा करने पर विशेष ध्यान देते थे। संत श्री रामानन्द जी महाराज के शिष्य बनकर उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित किया।उनकी समयानुपालन की प्रवृत्ती तथा मधुर व्यवहार के कारण उनके सम्पर्क में आने वाले लोग उनसे बहुत प्रसन्न रहते थे। प्रारम्भ से ही संत श्री रविदास जी महाराज बहुत परोपकारी तथा दयालू थे और दूसरों की सहायता करना उनका स्वभाव बन गया था। साधु-संतों की सहायता करने में उनको विशेष आनंद मिलता था। वे उन्हें प्रायः मूल्य लिए बिना जूते भेंट कर दिया करते थे। संत श्री रविदास जी महाराज भारत के उन चुनिंदा महापुरुषों में से एक हैं जिन्होंने अपने वचनों से एकता और समरसता पर ज़ोर दिया। असमानता की भावना और समाज में मुश्किल परिस्थितियों में अपने अनुयायियों को और समाज बंधुओं को हिन्दू बनाए रखना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। वह भारत में इस्लाम के आक्रमण का काल था साथ ही हिन्दू समाज को प्रताड़ित करने का भी वह कालखंड था ऐसे समय में महान संत श्री रामानन्द जी महाराज की प्रेरणा व आशीर्वाद प्राप्त कर समाज में समरसता की बहार लाने का काम संत श्री रविदास जी महाराज ने बख़ूबी किया।आपने समाज में फैली कुरीतियो के अंत के लिए जीवन भर काम किया। संत श्री रविदास जी महाराज की अनूप महिमा को देख बड़ी संख्या में लोग आपकी शरण में आकर भक्ति मार्ग से जुड़े। संत श्री रविदास जी महाराज के भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ते हुए मीराबाई ने आपको अपना गुरु मानकर अपनी आध्यात्मिक उन्नति की।भगवान श्री राम जी और श्री कृष्ण जी की भक्ति में लीन संत श्री रविदास जी महाराज धीरे धीरे लोगों की भलाई करते गए और समाज को एकत्व के धागे में फ़िरोते गए। आपको विद्वानों की संगत में रहने एवं संतो के सानिध्य में बड़ा आनंद आता था। लोकब्यौहार में प्रसंग आता है कि एक बार आस पास के लोग गंगा स्नान के लिए जा रहे थे तो किसी ने आपको भी गंगा स्नान के लिए चलने को कहा। अपने काम में मग्न संत श्री रविदास जी महाराज ने उन्हें एक सुपारी दी और कहा कि मेरी तरफ से ये मां गंगा को अर्पित कर देना। जैसे ही उस शख़्स ने वह सुपारी मां गंगा को अर्पित की उसे सोने का एक कंगन मिल गया। उस व्यक्ति के मन में लालच आ गया उसने कंगन संत श्री रविदास जी महाराज के बजाय, इनाम की लालसा में, राजा को दे दिया। रानी ने उस शख़्स से वैसा ही एक और कंगन लाने को कह दिया। राजा ने आदेश दिया कि यदि ये इच्छा पूरी नहीं हुई तो उसे दंड मिलेगा। परेशान व्यक्ति ने जब पूरी कहानी संत श्री रविदास जी महाराज को बताई तो उन्होंने नाराज़ होने के बजाय पूरे मन और शक्ति से मां गंगा को याद किया, अपनी कठौती में हाथ डाला और एक कंगन उसमें से नकालकर उस व्यक्ति को दे दिया और कहा कि मन चंगा तो कठौती में गंगा संत श्री रविदास जी महाराज का विश्वास था कि ईश्वर की भक्ति के लिए सदाचार, परहित भावना तथा सदव्यवहार का पालन करना अत्यावश्यक है। अभिमान त्याग कर दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने और विनम्रता तथा शिष्टता के गुणों का विकास करने पर आपने बहुत बल दिया। आपके अनुसार, ईश्वर की भक्ति बड़े भाग्य से प्राप्त होती है। अभिमान शून्य रहकर काम करने वाला व्यक्ति जीवन में सफल रहता है जैसे कि विशालकाय हाथी शक्कर के कणों को चुनने में असमर्थ रहता है जबकि लघु शरीर की चींटी इन कणों को सरलतापूर्वक चुन लेती है। इसी प्रकार, अभिमान तथा बड़प्पन का भाव त्यागकर विनम्रता पूर्वक आचरण करने वाला मनुष्य ही ईश्वर का भक्त हो सकता है। संत श्री रविदास जी महाराज की वाणी भक्ति की सच्ची भावना, समाज के व्यापक हित की कामना तथा मानव प्रेम से ओत प्रोत होती थी। इसलिए आपके वचनों का श्रोताओं के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता था। आपके भजनों तथा उपदेशों से लोगों को ऐसी शिक्षा मिलती थी जिससे उनकी शंकाओं का संतोषजनक समाधान हो जाता था और लोग स्वतः आपके अनुयायी बन जाते थे। भाजपा जिला अध्यक्ष दिलीप पांडे ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन से हम सभी को प्रेरित होकर उनके आचरण व्यक्तित्व और कृतित्व को अपने रोजमर्रा के व्यवहार में उपयोग करना चाहिए l

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  •  जबलपुर से चलने वाली नर्मदा एक्सप्रेस कैंसिल

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर से भोपाल होते हुए इंदौर जाने वाली नर्मदा एक्सप्रेस 21 से 24 जून तक 4 दिनों तक कैंसिल कर दी गई है। इसी तरह वापसी की नर्मदा एक्सप्रेस भी 22 से 25 जून तक कैंसिल रहेगी।
    वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक विश्वरंजन ने बताया कि कटनी के पास कटंगी खुर्द स्टेशन पर रेलवे का प्री नॉन इंटरलॉकिंग और इंटरलॉकिंग कार्य शुरू होने वाला है। इसे देखते हुए रेल प्रशासन ने नर्मदा एक्सप्रेस के साथ ही भोपाल से संतरागाछी के बीच चलने वाली ट्रेन 02157/58 को भी 23 और 24 जून को रद्द कर दिया है। नॉन इंटरलॉकिंग के चलते पांच यात्री गाड़ियों की दिशाओं में भी बदलाव किया गया है। 

    दुर्ग से कानपुर के बीच संचालित ट्रेन 08203

    दुर्ग से नौतनवा के बीच संचालित ट्रेन 08201

    वलसाड़ से पुरी जाने वाली ट्रेन 092096

    कोलकाता से मादर स्टेशन जाने वाली ट्रेन 09607

    हावड़ा से भोपाल के बीच चलने वाली ट्रेन 03025

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  • ”बाणसागर विस्थापित कल्याण कोष” बनाये जाने का औचित्य और अनिवार्यता (कविता – डूबते गाँव )


    शहडोल । बाणसागर बांध परियोजना में अनुमानित व्यय रु 65 अरब है तथा आज की स्थिति में इससे अधिक लाभ अकेले म.प्र.को मिल चुका है। अन्य राज्यों उ.प्र.तथा बिहार का लाभ भी लागत से अधिक मिल गया होगा क्योंकि उनके क्षेत्रों में नहरों का जाल पहले से भी तैयार था। अर्थात जो बांध निर्माण में लाभ-लागत का अनुपात 2:1:1 क्रमश: म.प्र.,उ.प्र.तथा बिहार का रहा है। वह सम्पूर्ण लागत अब निकल आई और अब तीनों राज्यों को लाभ हीं लाभ है।

    इस बांध परियोजना के डुबान में म.प्र. के 336 गांव आये।लगभग 1लाख लोग पुनर्वासित हुये। भारत का यह अनोखा विस्थापन रहा कि प्रभावित लोगों ने विन्ध्य की पौराणिक विनयशीलता का अनुपालन करते हुये आंखों में आंसू भरकर बिना किसी आन्दोलन, धरना के मूक-शांत होकर परियोजना के लिये अपनी माटी, घर, संस्कृति, संस्मरण सब कुछ त्याग कर कुछ परिवार आदर्श गावों में कुछ इधर-उधर जमीन का टुकड़ा खरीद कर पुनर्वासित हो गये। प्रभावित परिवारों को मिला मुआवजा जो तीन वर्षों की रजिष्ट्री के औसत मूल्य पर दिया गया तथा रु.2000/-प्रति पुनर्वास भत्ता दिया गया वह भी धन लोलुप माफियाओं ने धन को 2 वर्ष में दुगुना करने का प्रलोभन देकर रफूचक्कर हो गये। उदाहरणार्थ.. महाकौशल बैंक, जेवीजी, सागौन वन का पट्टा देनेवाली-ग्रीन प्लांट कं. वगैरह।

    बेचारे विस्थापित पूरी तरह अन्यायियों, धन माफियायों से ठग लिये गये। आज विस्थापितों की हालत दयनीय है। उन्हें अपने मूल व्यवसाय, बाजार और भूमि के अनुकूल कोई साधन नहीं मिल पाया। माडल टाउन्स का भी बहुत बुरा हाल है। रोजगार के अवसर नगण्य। रोजी रोटी की समस्या की गुहार कोई सुननेवाला नहीं। प्रवासी मजदूरी की विकट समस्या।

    बाणसार बांध परियोजना विस्थापितों के लिये आज भी अभिशाप है भले हीं लाभान्वित क्षेत्र के अन्तर्राज्यीय शोण जल मिल जाने पर जय जयकार कर रहे हैं और सरकारें यशोगान कर अपना स्वयं का गुणगान कर रही हैं। उन्हें सबको याद भी नहीं रहा है कि इस शोण जल में 332 गावों के एक लाख से अधिक मनुष्यों के आंसू तथा पेंड़, पहाड़, कीटपतंगों, पशु-पक्षियों का करुण क्रंदन भी मिला हुआ है और जब तक शोण जल बाणसागर से निसृत होता रहेगा, यह अनंत काल तक विस्थापितों का दर्द, आंसू का ध्यान और याद कराता रहेगा। और इस दु:खद पीड़ा गंगा से गंगासागर तक जाती रहेगी।

    विस्थापितों के दुख, दर्द कम करने के लिये एवं आंसू पोंछने के लिये बाणसागर से लाभान्वित राज्य सरकारें और जनमानस अपने लाभ का हिस्सेदार इन विस्थापितों को बनाने से मूल अभिशाप के भाव को सकारात्मक वरदान के रुप में परिवर्तन करने में सहायक होगा।

    अतेव यह नवाचार कि “बाणसागर विस्थापित कल्याण कोष “लाभ लागत के अनुपात में न्यूनतम 500करोड़ का बनाया जाय तथा सैनिक कल्याण बोर्ड की तरह इन विस्थापितों को सतत् मदद दी जाय और इनके दुख में हमारी सभी की समवेदना तथा दीर्घकालीन सहयोग बना रहे।

    विस्थापितों की पीड़ा को कविता में व्यक्त किया है डुबान क्षेत्र के मूर्धन्य कविवरश्री रामदास पयासी डूब-ग्राम देवराज नगर ने.अपनी पुस्तक में लिखा है कि.बाण सागर बांध हमारे विन्ध्य धरा का एक मसहूर बांध है जो हमारी कृषि आत्मनिर्भरता का भी परिचायक है। इसके पहले भी केन नदी में एक बांध अग्रेजो के समय से बंधा है किन्तु सिंचाई यूपी की होती थी।

    वैसे यह बांध हमारे विन्ध्य के लिए गौरव तो है पर उतना उपयोगी नही सिद्ध हुआ जितना विन्ध्य का जंगल डूब गया और सैकड़ो ग्राम ब्यस्थापन का दंश झेल रहे हैं। श्री रामदास पयासी हमारे विन्ध्य धरा के न सिर्फ वरिष्ठ कवि हैं बल्कि बाणसागर डूब से प्रभावित भी रहे हैं जो अपना घर द्वार खेत जंगल गाँव सब कुछ डुबा विस्थापन की जिंदगी जीते कुछ वर्ष पहले दुनिया से अलविदा हो गए। उनका अपना गाँव छिन जाने का दर्द कमोवेश उसी तरह है जैसे हम सभी का अपना विन्ध्य प्रदेश ..

    कविता – डूबते गाँव

    स्व.पं. रामदास पयासी ।

    ——-::——-::—–
    प्रजातंत्र के संप्रभुओं को,यह थल समुचित भाया।
    और इसी थल सोन बांधने,का निश्चय ठहराया।।

    होगा बांध सिंचाई होगी,उत्तर मध्य बिहार।
    कृषि की पैदावार बढ़ेगी,होगा सुख विस्तार।।

    होगा नाम बाणसागर,कवि बाणभट्ट के नाँव।
    हुए कभी इतिहास काल मे,प्रेमकूट के गाँव।।

    जड़ काटा डाली को सींचा,किया मीन बिन पानी।
    अरु विकास है नाम धराया,करके यह नादानी।।

    दो सौ अधिक गाँव जल बूडे,धन व्यय हुआ अपार।
    हठधर्मी का हुआ समापन,बूड़े बहे हजार।।

    सुन्दर गाँव उजाड़ा पहले,कृषक बिना घर वार।
    भूमि डुबाया बांध बनाकर,किया सर्व संहार।।

    तुष्टि मिली बस सम्प्रभुओं को,सुन्दर बाग उजार।
    गागर में सागर को देखा,सत सत आंख पसार।।

    नयन वान दिन अंध वुद्धि से,जिन्हें न नाता ।
    हठ कर्मी वह मनुज,गीत बिन मौसम गाता।।

    पड़ी पिता की लाश,विरह बाबा पर करता।
    अज्ञानी वह स्वयं, अपर संग लेकर मरता।।

    अबुध सोच; नर सहस,सहस घर हीन हुये हैं।
    ललनायें विलखाती,शिशु को गोद लिये हैं।।

    पशु विडरे देवालय जल में,लीन हुए हैं।
    अपनी ही धरती में जन, घर हीन हुये हैं।।

    श्रम से अर्जित कृषक भूमि सब,जल में डूबी।
    श्रम निर्मित घर सहज उजाड़े,यह तव खूबी।।

    हरित आम के कुन्ज लगे,जल में लहराये।
    देख तुम्हारे सब पुरखे हैं, तर्पण पाये।।

    लहराता जल देख न दर्शक,भान रहेगा।
    जल तल डूबे गाँव न यह कुछ,ज्ञान रहेगा।।

    तुगलक शाह उजाड़ा दिल्ली,अपर किया रजधानी।
    पुनः लौट दिल्ली में आया,दिखा सभी नादानी।।

    प्रजातंत्र में राजतंत्र की,पुनरावृत्ति निराली।
    सदी वीसवीं भारत शासन,की यह दिवस दिवाली।।

    देख रहा है विश्व समूचा,भारत सुखद सुराज।
    गांधी के चेलों की करनी,बिना वुद्धि का राज।।

    मंदिर मस्जिद डूबे कितने,मानव देवस्थान।
    कितने श्रम का ह्रास हुआ,कितने दुख का उत्थान।।

    कितने बिन घर वार हुये, कितने आंखों में पानी।
    बांध बना लहराता है बस,शासन की नादानी।।



    यह भी पढ़ें – बाणसगर डूब क्षेत्र -गरीबी शिक्षा एवं स्वास्थ्य

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    खबरें फटाफट

  • ‘गोल्डन ब्लड’ जो बचा सकता है सबकी जान, आपका ग्रुप क्या है आपको पता है?

    गोल्डन ब्लड सुनकर ही किसी बेशकीमती चीज़ का अहसास होता है। यह ख़ून का दुर्लभ ग्रुप है जो दुनिया में बहुत कम लोगों का होता है

    भले ही इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को आप ख़ास समझें मगर हक़ीकत यह है कि उनके लिए यह बात कई बार जानलेवा भी बन जाती है।

    जिस ब्लड ग्रुप को गोल्ड ब्लड कहा जाता है, उसका असली नाम आरएच नल (Rh null) है।

    Rh null क्या है और यह क्यों इतना क़ीमती समझा जाता है कि इसकी तुलना सोने से होती है? आख़िर इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को क्या ख़तरा होता है?

    इन सवालों के जवाब जानने के लिए पहले हमें पहले यह समझना होगा कि ब्लड ग्रुप का वर्गीकरण कैसे होता है।

    ऐसे तय होते हैं ब्लड ग्रुप

    ख़ून जिन लाल रक्त कोशिकाओं से बना होता है, उनके ऊपर प्रोटीन की एक परत होती है, जिन्हें एंटीजन कहा जाता है।

    ब्लड टाइप A में सिर्फ़ एंटीजन A होते हैं, ब्लड B में सिर्फ एंटीजन B, ब्लड AB में दोनों एंटीजन होते हैं और टाइप O में दोनों ही नहीं होते।

    लाल रक्त कोशिकाओं में एक और तरह का एंटीजन होता है. इसे कहते हैं RhD. यह एंटीजन 61 Rh टाइप के एंटीजनों के समूह का हिस्सा होता है. जब ख़ून में Rhd हो तो इसे पॉज़िटिव कहा जाता है और अगर न हो तो नेगेटिव टाइप कहा जाता है।

    इस तरह से सामान्य ब्लड ग्रुप्स की पहचान करके उनका वर्गीकरण इस तरह किया जाता है: A-, A+, B+, B-, AB+, AB-, O+ और O-.

    अगर किसी को ख़ून चढ़ाने की ज़रूरत पड़े तो उसके ब्लड ग्रुप का पता होना ज़रूरी होता है। अपने ब्लड ग्रुप का पता सभी को होना चाहिए।

    अगर नेगेटिव ग्रुप वाले शख़्स को पॉज़िटिव वाले डोनर का ख़ून चढ़ाया जाए तो यह उनके लिए जानलेवा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके शरीर के एंटीबॉडीज़ इस ख़ून को अस्वीकार कर सकते हैं।

    इसी कारण O- ब्लड ग्रुप वालों को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है।क्योंकि इसमें न तो एंटीजन A, B होते हैं और न ही RhD. ऐसे में ख़ून बिना रिजेक्ट हुए अन्य ग्रुप वालों के ख़ून में मिक्स हो जाता है।

    सामान्यतः इस प्रकार ब्लड लिया और दिया जाता है

    ख़तरनाक ‘गोल्डन ब्लड’

    इस तरह से ख़ून के जितने भी कॉम्बिनेशन हैं, उनमें Rh null सबसे अलग है।

    अगर किसी के रेड ब्लड सेल में Rh एंटीजन है ही नहीं, तो उसका ब्लड टाइप Rh null होगा।

    बायोमेडिकल रिसर्च पोर्टल मोज़ेक पर छपे लेख में पेनी बेली ने लिखा है कि पहली बार इस ब्लड टाइप की पहचान 1961 में की गई थी। ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासी महिला में यह मिला था। उसके बाद से लेकर अब तक पूरी दुनिया में इस तरह से 43 मामले ही सामने आए हैं।

    इस तरह का ब्लड अनुवांशिक रूप से ही मिलेगा। “माता-पिता दोनों इस म्यूटेशन के वाहक होने चाहिए.” तभी बच्चों में आएगा।

    Rh null ब्लड टाइप एक वरदान भी हो सकता है और अभिशाप भी।

    एक तरह से तो यह यूनिवर्सल ब्लड है जो किसी भी Rh टाइप वाले या बिना Rh वाले दुर्लभ ब्लड टाइप वाले को चढ़ाया जा सकता है। मगर ऐसा बहुत कम मामलों में ही किया जाता है क्योंकि इसे पाना लगभग असंभव है।

    इसी कारण, “बेहद दुर्लभ होने के कारण ही इसे गोल्डन ब्लड कहा जाता है.”

    इस टाइप का ख़ून बेशकीमती होता है। भले ही इस ख़ून को ब्लड बैंकों में बिना किसी नाम-पते के स्टोर किया जाता है, मगर ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें वैज्ञानिकों ने अपने शोध के लिए ब्लड सैंपल लेने के इरादे से रक्तदान करने वालों का पता लगाने की कोशिश की है।

    महंगा पड़ता है यह ब्लड ग्रुप होना

    गोल्डन ब्लड ग्रुप होना कई बार लोगों को महंगा भी पड़ता है। अगर उन्हें ख़ून चढ़ाने की ज़रूरत हो तो उन्हें सिर्फ़ Rh null ब्लड ही चढ़ाया जा सकता है जिसे खोजना मुश्किल होता है। न सिर्फ़ इसलिए कि इस ब्लड टाइप वाले लोग बहुत कम हैं और अगर दूसरे देश में कोई डोनर मिल जाए तो ख़ून को लाना पेचीदा काम बन जाता है।

    आरएच नल ब्लड टाइप वाले लोग ब्राज़ील, कोलंबिया, जापान, आयरलैंड और अमरीका में रहते हैं।

    इन्हें प्रोत्साहित किया जाता है कि वे ख़ून को डोनेट करते रहें ताकि यह उनके लिए भी कभी रिज़र्व के तौर पर काम आए। मगर चूंकि इस ब्लड वाले लोग बहुत कम हैं, इसलिए इनका ख़ून अन्य ज़रूरतमंदों के काम भी आ जाता है।

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