March 1, 2024

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शहडोल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का भंडाफोड़

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शहडोल जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का भंडाफोड़ हुआ है। इस कार्य में लिप्त चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जिसमें मेडिकल कॉलेज की एक स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज के सामने अमित फार्मा नाम से संचालित मेडिकल स्टोर का संचालक और दो अन्य शामिल हैं।

शहडोल जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का भंडाफोड़ हुआ है। इस कार्य में लिप्त चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जिसमें मेडिकल कॉलेज की एक स्टाफ नर्स, मेडिकल कॉलेज के सामने अमित फार्मा नाम से संचालित मेडिकल स्टोर का संचालक और दो अन्य शामिल हैं। एडिशनल एसपी मुकेश कुमार वैश्य ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया है कि पुलिस अधीक्षक अवधेश गोस्वामी द्वारा रेमडेसिविर इंजेक्शन एवं ऑक्सिजन सिलेण्डर की कालाबजारी की रोकथाम हेतु चलाये जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है।

एएसपी ने बताया कि थाना सोहागपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि दीपक गुप्ता एवं उज्जवल द्विवेदी निवासी कुदरी रोड शहडोल अपने पास रेमडिसिबिर इंजेक्शन बिक्री करने के उद्देश्य से रखे हुए हैं ये दोनों कुदरी वायपास रोड में खडे हैं। सूचना पर एसपी द्वारा गठित एसआईटी टीम को सूचित किया गया और मुखबिर के बताए स्थान पर जाकर देखा तो दो व्यक्ति रोड के किनारे खडे दिखे जो पुलिस को देखकर भागने लगे। इनको एसआईटी टीम व पुलिस फोर्स की मदद से पकडकर पूछताछ की गई तो तो अपना नाम दीपक गुप्ता पिता सीताराम गुप्ता 23 निवासी कौडिया जिला उमरिया हाल कुदरी रोड शहडोल एवं दूसरे व्यक्ति ने अपना नाम उज्जवल द्विवेदी पिता धनीराम द्विवेदी निवासी ग्राम चंदिया जिला उमरिया हाल कुदरी रोड शहडोल का होना बताया। दोनों की तलाशी लेने पर 2 नग रेमडेसिविर इन्जेक्शन मिले। आरोपितों से रेमडेसिविर इन्जेक्शन के संबंध में दस्ताबेज मांगने पर कोई बैध दस्तावेज पेश नहीं किया गया।

जनचर्चा है कि जो सरकारी इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज में मरीजों को लगाने के लिए आते थे, वह मरीजों को नहीं लगाया जा रहा था बल्कि बाजार से नकली इंजेक्शन मंगाकर मरीजों को लगा दिया जाता था। ओरिजिनल इंजेक्शन ₹ 10000 में बेच दिया जाता थाl वैसे तो प्रदेश के कई शहरों में ऐसे मामले पकड़े गए हैं परंतु राष्ट्रीय आपदा के इस दौर में जब महामारी ने भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है प्रतिदिन मरीजों की जान जा रही हैl मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है 400 से अधिक मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं और उन्हें स्वस्थ होने की उम्मीद है परंतु धन के लालच में लोगों की जान की परवाह किए बिना मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और नर्स इतनी शर्मनाक घटना को अंजाम दे रहे थे।

इसकी जितनी आलोचना की जाए कम है।
चर्चा तो यह भी है कि मेडिकल कॉलेज के बड़े अधिकारी भी इस अपराध में शामिल हो सकते हैं….?
इस घटना की बारीकी से जांच करने पर इसका भंडाफोड़ हो सकता है हो सकता हैl

इन लोगों का बताया कालाबाजारी में हाथ

एएसपी ने बताया कि जब इनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि सुषमा साहू (मेडिकल कॉलेज स्टॉफ नर्स) मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोविड 19 के मरीजों को आवंटित इंजेक्शन मरीजों को न लगाकर चोरी छिपे बिक्री हेतु अमित मिश्रा (अमित फार्मा के संचालक) को देती थी। इस पर पुलिस ने अमित मिश्रा, सुषमा साहू, दीपक गुप्ता और उज्जवल द्विवेदी के खिलाफ धोखाधड़ी, मप्र ड्रग कंट्रोल, मप्र आयुर्वेदिक अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्व किया और इनको गिरफ्तार किया गया।

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