March 3, 2024

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RBI, काम कर रहा है नए जमाने के ‘करेंसी नोट’ पर … जानें डिटेल्स

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बीते महीने आरबीआई और वित्त मंत्रालय कह चुका है कि वे भारत की डिजिटल करेंसी और उसके के लिए क़ानून बनाने पर विचार करेंगे। लेकिन भारत की ख़ुद की डिजिटल करेंसी लाना आसान नही है….

नए जमाने के 'करेंसी नोट' पर काम कर रहा है RBI, लेकिन इसे जेब में लेकर नहीं घूम सकेंगे... जानें डिटेल्स

आइए जानते हैं क्रिप्टोकरेंसी के बारे में… 

पिछले महीने आरबीआई ने फिर एक बार दोहराया था कि वो खुद की क्रिप्टो करेंसी लाने जा रहे है। अभी इसके चलन को लेकर ऑप्शन पर काम जारी है। हालांकि, सरकार पिछले कुछ महीनों से क्रिप्टोकरंसी के खिलाफ कार्रवाई की योजना बना रही है। अगर नया विधेयक कानून का रूप लेता है तो यह निवेशकों के लिए चिंता का विषय होगा। अगर ऐसा होता है तो भारत क्रिप्टोकरेंसी को अवैध बनाने वाली पहली बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। यहां तक ​​कि चीन में भी इसे लेकर सजा का प्रावधान नहीं है। भारत में 70 लाख से अधिक लोगों ने क्रिप्टोकरंसी में 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

सबसे पहले जानते हैं क्रिप्टोकरेंसी के बारे में… 

डिजिटल या क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं। बिटकॉइन के अलावा दुनिया में सैकड़ों अन्य क्रिप्टो करेंसी भी मौजूद हैं जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कॉइन, वॉइस कॉइन और मोनरो।

बिटकॉइन (Bitcoin) भी क्रिप्टोकरेंसी है। इसे सातोशी नकामोति ने 2008 में बनाया था। हालांकि आजतक यह नहीं पता चल पाया है कि सातोशी नकामोति कौन है। इसे पहली बार 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में जारी किया गया था। इसको कोई बैंक या सरकार कंट्रोल नहीं करती है।

भारत में रिजर्व बैंक ने इसे मान्यता नहीं दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में लेन देन की इजाज़त दे दी है। यानी भारत में भी बिटकॉइन की खरीद-फरोख्त हो सकती है।

क्रिप्टोकरेंसी का मुनाफा काफ़ी अधिक होता है, ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है। क्रिप्टो करेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है। इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।

साल 2009 में जब बिटकॉइन को लांच किया गया था तब उसकी वैल्यू 0 डॉलर थी। 2010 में भी इसकी वैल्यू 1 डॉलर तक नहीं पहुंची। लेकिन आज एक बिटकॉइन का रेट करीब 45 लाख रुपये के करीब है।

अब क्या कर रहा है RBI

इसको लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है कि कितने भारतीयों के पास क्रिप्टो करेंसी है या कितने लोग इसमें व्यापार करते हैं लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि करोड़ों लोग डिजिटल करेंसी में निवेश कर रहे हैं और महामारी के दौरान इसमें बढ़ोतरी हुई है।

बीते महीने आरबीआई और वित्त मंत्रालय कह चुका है कि वे भारत की खुद की डिजिटल करेंसी और उसके के लिए कानून बनाने पर विचार करेंगे. लेकिन भारत की खुद की डिजिटल करेंसी लाना आसान नही है। सरकार केवल किसी प्रकार के लेन-देन को एक लीगल टेंडर का दर्जा देगी जो कि भारत की भारी जनसंख्या इस्तेमाल कर सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लीगल टेंडर (मान्यता देना) को जारी करना चुनौतीपूर्ण है। अगर आसान शब्दों में कहें तो आम लोगों तक इसे पहुंचाना एक बड़ा टास्क होगा।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कानून बनाना आसान नहीं होगा। भारत में इसको लेकर कई चुनौतियां है। यहां पर सबसे बड़ा सवाल ये उठता है क्या ये आम चलन में इस्तेमाल होगी। क्या ये डिजिटल लीगल टेंडर होंगे या इनका आम जनता भी इस्तेमाल कर सकेगी।

इसके अलावा देश के बैंकिंग सिस्टम के सामने मनी लॉन्ड्रिंग डाटा प्रोटेक्शन जैसे कई मामले खड़े हो जाएंगे। लेकिन कोरोना काल में भारत में तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था बढ़ी है। इसीलिए इसको लेकर उम्मीदें बढ़ रही है।

RBI ने इन चीज़ों को लेकर जताई चिंता

आरबीआई ने हाल में कहा था कि किसी देश की करेंसी उसका सोवरन राइट है और यह किसी एक व्यक्ति के साथ नहीं जोड़ा जा सकता. अब तक इस तरह के इंस्ट्रूमेंट को कानूनी जामा पहुंचा पहनाने की कोशिश सफल नहीं हो पाई है।

इसीलिए RBI ने केंद्र सरकार को सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं से भी अवगत कराया है। आरबीआई ने कहा है कि क्रिप्टो करेंसी को देश में इजाजत देने की वजह से मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को बढ़ावा मिल सकता है।

क्रिप्टो करेंसी के ट्रांजैक्शन में लेन-देन करने वाले के नाम का पता नहीं लगता, इसलिए इसका उद्देश्य देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। हाल में एक इंटरव्यु में आरबीआई के अधिकारी ने कहा था कि इसमें बहुत सारे कोड हैं और बहुत से ट्रांजैक्शन होते हैं। इसमें सोर्स का पता लगाना बहुत मुश्किल है क्योंकि इस तरह के इंस्ट्रूमेंट का नेचर बहुत जटिल होता है।

आरबीआई के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय चलन के अनुसार इस तरह के ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग में काफी मुश्किलें आ सकती हैं। वास्तव में क्रिप्टोकरेंसी में लाभ पाने वाले की पहचान करना और ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना बहुत मुश्किल काम है।

आइए जानें सरकार का क्या कहना है?

बिटकॉइन, सहित सभी क्रिप्टोकरेंसी के साथ जुड़े जोखिमों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 अप्रैल , 2018 को एक परिपत्र के माध्यम से देश की सभी संस्थाओं को सलाह दी है कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कोई भी काम नहीं करें।

लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 04 मार्च , 2020 को अपने एक फैसले में 2018 के डब्ल्यूपी ( सी ) सं . 528 और 2018 के डब्ल्यूपी ( सी ) सं . 373 में दिनांक 06 अप्रैल , 2018 के उपर्युक्त परिपत्र को खारिज कर दिया है।

सरकार डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रवेश करने हेतु ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी का सक्रिय रूप से उपयोग करके उसका पता लगाएगी।

अब क्या है सरकार की तैयारी

क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित मुद्दों का अध्ययन करने को लेकर केंद्र सरकार ने एक कमेटी बनाई है। देश में अभी प्रचलित सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सिर्फ सरकार के पास ही इसे चलाने का अधिकार होगा। इसको लेकर  विशिष्ट कार्रवाई करने के प्रस्ताव के लिए सचिव ( आर्थिक कार्य ) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

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