March 3, 2024

VINDHYA CITY NEWS

सच्‍ची खबर अच्‍छी खबर

वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले, जानिये टैक्स बचाने के तरीके

मित्रों के साथ शेयर करें

वित्तीय वर्ष 2020-21 खत्म होने में कुछ ही दिन का समय बचा है। अगर आपने अभी तक टैक्स बचाने के लिए अभी तक निवेश नहीं किया है अब देरी न करें। हम आपको बता रहे हैं कि कहां पैसा निवेश कर सकते हैं और आपके अभी के निवेश या लोन पर आप कैसे पैसे बचा सकते हैं।

80C के तहत मिलने वाली छूट
आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत सरकार 1,50,000 रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट देती है। इसमें कई तरह के निवेश के विकल्प शामिल हैं। उन विकल्पों के बारे में जानते हैं–

1. होम लोन के मूलधन पर टैक्स छूट
अगर आपने घर खरीदने या बनवाने के लिए होम लोन लिया है और उसे EMI में चुका रहे हैं तो आपको टैक्स सेविंग में फायदा मिलेगा। इसकी वजह है कि होम लोन में मूलधन यानी प्रिंसपल अमाउंट सेक्शन 80सी के तहत टैक्स फ्री है।

2.बच्चों की पढ़ाई पर है टैक्स छूट
बच्चों की पढ़ाई की फीस के तहत दी जाने वाली ट्यूशन फीस इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स सेविंग के दायरे में आती है। ये छूट सरकारी या प्राइवेट स्कूल, कॉलेज या संस्थान में जमा की गई ट्यूशन फीस पर ही मिलती है। यह छूट सिर्फ फुल टाइम रेगुलर कोर्सों के लिए दो बच्चों की पढ़ाई तक ही सीमित होती है। 

3.पब्लिक प्रोविडंट फंड (PPF)
पब्लिक प्रोविडंट फंड (पीपीएफ) लंबी अवधि का एक लोकप्रिय निवेश विकल्प है। यह न सिर्फ सुरक्षित निवेश माना जाता है बल्कि इसमें बेहतर ब्याज भी मिलता है। साथ ही इसमें किया जाने वाला पूरा निवेश टैक्स फ्री होता है। पीपीएफ खाता पर सालाना आधार पर 7.6 फीसद की दर से ब्याज मिलता है। मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फ्री होता है। परिपक्वता पर मिलने वाली रकम भी पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।

4. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)
सैलरी पाने वाले एंप्लॉयी इस विकल्प में पहले से ही इन्वेस्ट कर रहे हैं। हर महीने आपको मिलने वाले वेतन के बेसिक का 12% राशि आपके ईपीएफ अकाउंट में रकम जमा हो जाती है। अगर आप चाहें तो स्वेच्छा से अधिक का योगदान भी कर सकते हैं।

5.ईएलएसएस में कर सकते हैं निवेश
ईएलएसएस म्यूचुअल फंड में निवेश की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स बचाने के साथ ही अच्छा रिटर्न दिलाना है। रिटर्न पर एक अप्रैल 2018 से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाने के बावजूद यह निवेश रिटर्न के लिहाज से अच्छा है। ईएलएसएस से केवल एक लाख से अधिक का लाभ एलटीसीजी कर के तहत कर योग्य होगा। 

6.सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (एससीएसएस) आयकर एक बेहतर योजना है।  सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में फिलहाल 8.7 फीसद की दर से ब्याज मिल रहा है। इस स्कीम में किया जाने वाला निवेश आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी के अंतर्गत कर छूट के दायरे में आता है।

7. बैंक में पांच साल की एफडी
आयकर की धारा 80 सी के तहत आयकर बचाने के लिए सावधि जमा योजना (एफडी) पुरानी और सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली निवेश योजना है। इस पर अभी बैंक  4.5% से 7.5% प्रतिवर्ष के बीच ब्याज दे रहे हैं। एफडी से प्राप्त होने वाले ब्याज पर कर चुकाना पड़ता है। टैक्स बचाने के लिए अगर आप एफडी में निवेश कर रहे हैं तो आपको 5 साल की लॉक-इन अवधि के लिए निवेश करना होगा। इससे कम अवधि के निवेश पर आप टैक्स छूट का लाभ नहीं ले पाएंगे। कई बैंक टैक्स सेविंग एफडी के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करवाते हैं। परिपक्वता के बाद राशि सीधे आपके बैंक खाते में आ जाती है।

8.इंश्योरेंस प्रीमियम
लाइफ इंश्योरेंस या बीमा पॉलिसी पर चुकाए प्रीमियम पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। सेक्शन 80C के तहत टैक्स लाभ लेने के लिए आपको हर साल नया प्लान लेने की जरूरत नहीं है। हर साल चुकाए जा रहे प्रीमियम पर टैक्स छूट ले सकते हैं।

9. सुकन्या समृद्धि योजना 
केंद्र सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत लॉन्च की गई यह स्कीम बेटियों के लिए बड़ा फंड तैयार करने के लिए अच्छा विकल्प है। यदि आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो आप यह खाता खोल सकते हैं। यह अकाउंट आपकी बेटी के 21 वर्ष का होने पर मैच्योर होगा। इस पर टैक्स छूट का लाभ भी उठा सकते हैं।

10. टर्म लाइफ इंश्योरेंस
टर्म लाइफ इंश्योरेंस के लिए चुकाई गई प्रीमियम की रकम पर आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इंश्योरेंस प्लान असल में बहुत मामूली प्रीमियम पर काफी अधिक जीवन बीमा कवर खरीदने का मौका देता है।

11.स्टांप ड्यूटी पर भी ले सकते हैं फायदा
घर खरीदने पर दी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज पर भी सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट ली जा सकती है। फिर चाहे घर लोन लेकर खरीदा हो या फिर अपने पैसों से। यह छूट उसी साल ली जा सकती है। अगर किसी ने ज्वॉइंट में प्रॉपर्टी खरीदी है, तो दोनों खरीदार स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज पर टैक्स छूट का दावा अपनी-अपनी हिस्सेदारी के मुताबिक कर सकते हैं। हालांकि इस सूरत में भी केवल 1.5 लाख रुपये तक का ही लाभ मिलेगा।

सेक्शन 80 Clause

सेक्शन 80D में छूट
मेडिकल इंश्योरेंस के लिए दिए गए प्रीमियम पर सेक्शन 80 डी में टैक्स छूट मिलती है. इसे आयकर रिटर्न के दौरान क्लेम किया जा सकता है. इसमें आपके अलावा, पति या पत्नी, माता-पिता और बच्चों को भी कवर दिया जाता है. इसमें 25,000 रुपए तक की टैक्स छूट क्लेम की जा सकती है. हालांकि, वरिष्ठ नागरिक होने की स्थिति में टैक्स छूट सीमा 50,000 रुपए तक है. इसके अलावा 5000 रुपए तक की टैक्स छूट हेल्थ चेकअप के लिए भी क्लेम की जाती है. 

सेक्शन 80 DD में छूट
अगर कोई टैक्सपेयर विकलांग की कैटेगरी में आता है या उसके परिवार को कोई सदस्य विकलांग हैं तो उसके उपचार के लिए भी टैक्स छूट क्लेम की जाती है. इसके लिए सेक्शन 80DD के तहत छूट मिलती है. अगर विकलांगता 40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच है, तो 75,000 रुपए तक क्लेम किया जा सकता है. वहीं, विकलांगता 80 फीसदी से ज्यादा है तो 125,000 रुपए टैक्स छूट क्लेम की जा सकती है. टैक्स छूट के लिए विकलांगता का प्रमाण पत्र (फॉर्म नंबर 10, 10-IA) पेश करना होता है।

सेक्शन 80 DDB में छूट
सेक्शन 80 DDB में गंभीर बीमारियों पर किए गए खर्च पर 40,000 रुपए तक की टैक्स छूट का लाभ उठाया जा सकता. FY2018-19 के बाद से वरिष्ठ और बहुत वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 लाख रुपए तक की छूट क्लेम की जा सकती है. 

सेक्शन 80E में छूट
टैक्स छूट के लिए इस सेक्शन में हायर एजुकेशन के लिए गए एजुकेशन लोन के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है. हालांकि, इस पर सिर्फ 8 साल तक ही छूट ली जा सकती है. इसमें एक और कंडीशन पर भी टैक्स छूट मिलती है. अगर कानूनीतौर पर आप किसी के पैंरेटल में आते हैं तो उसके एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट का फायदा उठाया जा सकता है.

सेक्शन 80EE में छूट
अगर आपने पहली बार घर खरीदा है तो आप सेक्शन 80EE के तहत टैक्स छूट कलेम की जा सकती है. होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है. हालांकि, हर वित्तीय वर्ष में सिर्फ 50 हजार रुपए तक ही छूट मिलती है. इसमें कंडीशन यह है कि प्रॉपर्टी की कीमत 50 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. साथ ही आपके होम लोन का प्रिंसिपल अमाउंट 35 लाख रुपए तक होना चाहिए.

सेक्शन 80 G में छूट
सामाजिक कार्यों के लिए दिए गए दान पर भी टैक्स छूट मिलती है. सेक्शन 80 जी के तहत छूट क्लेम की जा सकती है. आप अपनी योग्यता सीमा के मुताबिक 100 फीसदी या 50 फीसदी की अधिकतम कटौती हासिल कर सकते हैं.

सेक्शन 80 GG में छूट
सेक्शन 80 GG के तहत टैक्स छूट मिलती है. हालांकि, इसमें छूट तभी मिलेगी जब आपने किसी तरह के किराए का भुगतान किया हो और HRA क्लेम नहीं किया हो. प्रति माह 5000 रुपए या कुल आय का 25 फीसदी या किराए के लिए किए गए भुगतान की 10 फीसदी आय को घटाने पर जो रकम निकलेगी उसमें जो सबसे कम होगी, उतनी रकम पर आपको टैक्स छूट मिलेगी. अगर आप जॉब में हैं और नियोक्ता से एचआरए पाते हैं तो आप उस रकम पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। अगर नियोक्ता से मिलने वाले वेतन में एचआरए शामिल नहीं है और आप किराए पर रहते हैं तो आप इस रकम पर आयकर कानून के सेक्शन 80जीजी के तहत टैक्स छूट पाने का दावा कर सकते हैं। एचआरए पर कर छूट का दावा करने के लिए आपको फॉर्म 10बीए में घोषणा करनी पड़ती है।

सेक्शन 80 GGA, GGB, GGC में छूट
किसी संस्थान, कॉलेज या विश्वविद्यालय (सरकार द्वारा अनुमोदित) को दिए गए दान की राशि पर टैक्स छूट मिलती है. सेक्शन 80 GGB के तहत, राजनीतिक दल के लिए किसी भारतीय कंपनी द्वारा किया गया योगदान टैक्स छूट के दायरे में आता है. सेक्शन 80 GGC के तहत राजनीतिक दल के लिए इंडिविजुअल ने अगर कोई योगदान किया है तो वह भी छूट के दायरे में आता है.

सेक्शन 80 TTA में छूट
सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट ऑफिस बचत खाते से 10,000 रुपए तक की ब्याज आय एक वित्तीय वर्ष में टैक्स छूट के दायरे में आती है. हालांकि, वित्त वर्ष 2018-19 से वरिष्ठ नागरिकों इस धारा से बाहर कर दिया गया है. 

सेक्शन 80TTB में छूट
बैंकों, डाकघरों या सहकारी समितियों में डिपॉजिट के ब्याज पर वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स छूट का फायदा मिलता है. सीनियर सिटीजन एक वित्तीय वर्ष में 50 हजार रुपए तक यह छूट ले सकते हैं.

अब ऐसे निवेश के बारे में जानते हैं जो 80सी में नहीं आते हैं पर टैक्स बचाने में काफी मददगार हैं। इनमें निवेश या हुए खर्च के जरिए आप डेढ़ लाख से अतिरक्त टैक्स बचा सकते हैं।

1.NPS में निवेश कर ले सकते हैं 50000 की और छूट 
एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करने पर भी टैक्स में छूट मिलती है। आयकर की धारा  80सीसीडी (1बी) के तहत कोई करदाता 50,000 रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का दावा कर सकता है। यानी आप  80सी के तहत 1.5 लाख रुपये के निवेश पर छूट पा रहे हैं और NPS में भी निवेश कर लेते हैं तो 2 लाख रुपये पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। 

2.हेल्थ इंश्योंरेंस पर छूट
देश में इलाज कराने का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में हर किसी के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना जरूरी हो गया है। आप हेल्थ इंश्योरेंस लेकर न सिर्फ बीमारी के समय वित्तीय बोझ से बच सकते हैं बल्कि आयकर से भी छूट प्राप्त कर सकते हैं। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80डी के अंतर्गत आपको अपने लिए, अपनी पति/पत्नी और बच्चों के लिए दिए गए सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक की कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। आप 60 साल से कम उम्र के माता-पिता के लिए खरीदी गई हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर अलग से 25,000 रुपये तक आयकर छूट का दावा कर सकते हैं। अगर आपके माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हैं तो आप इस मद में 50,000 रुपये तक छूट का दावा कर सकते हैं। 

3. हेल्थ चेकअप पर छूट
प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप कराने के फायदे ही फायदे हैं। जहां आप रेग्युलर हेल्थ चेकअप करवा कर कई बीमारियों के बारे में पहले ही अलर्ट हो सकते हैं, वहीं टैक्स भी बचाया जा सकता है। प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप के 5 हजार रुपये तक के बिल टैक्स छूट मिलती है।

4. होम लोन के ब्याज पर मिलती है छूट
इनकम टैक्स के सेक्शन 24 के अनुसार आपको होम लोन पर भरे जाने वाले ब्याज पर छूट मिलती है। होम लोन के ब्याज पर अधिकतम छूट दो लाख रुपये की मिलती है।

Tax भरने एवं बचाने से पहले अपने tax conceltent से सलाह जरूर लें। उपरोक्त के लिए हम जिम्मेदार नहीं है।


मित्रों के साथ शेयर करें
error: Content is protected !!