July 17, 2024

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आत्मनिर्भर भारत के उदय की साक्षी बनेगी नई संसद: PM मोदी

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नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं है। यह आत्मनिर्भर भारत और 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा नई संसद आत्मनिर्भर भारत के उदय की साक्षी बनेगी। यह दुनिया को भारत के संकल्प का संदेश देने वाले हमारे लोकतंत्र का मंदिर है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आज हर भारतीय नए संसद भवन को देखकर गर्व से भर गया है।
नई संसद से रविवार को दिए गए अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई संसद को नई नियति के साथ एक नया प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो दुनिया आगे बढ़ती है। उन्होंने टिप्पणी की कि संसद का नया भवन भारत के विकास के साथ-साथ विश्व के विकास का आह्वान भी करेगा। नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं है। यह आत्मनिर्भर भारत और 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा नई संसद आत्मनिर्भर भारत के उदय की साक्षी बनेगी। यह दुनिया को भारत के संकल्प का संदेश देने वाले हमारे लोकतंत्र का मंदिर है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आज हर भारतीय नए संसद भवन को देखकर गर्व से भर गया है।


140 करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि नई संसद आत्मनिर्भर भारत के उदय की साक्षी बनेगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं है बल्कि 140 करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक है। यह भारत के दृढ़ संकल्प के बारे में दुनिया को संदेश देती है। हर देश की विकास यात्रा में कुछ पल अमर होते हैं और 28 मई 2023 एक ऐसा ही दिन है।


हर देश की विकास यात्रा में कुछ पल हमेशा के लिए हो जाते हैं अमर
पीएम मोदी ने कहा हर देश की विकास यात्रा में कुछ पल ऐसे आते हैं जो हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं।आज 28 मई 2023 का ये दिन ऐसा ही शुभ अवसर है। देश आजादी के 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। ये विश्व को भारत के दृढ़ संकल्प का संदेश देता हमारे लोकतंत्र का मंदिर है। 


नया संसद भवन स्वतंत्रता सेनानियों के सपने साकार करने का बनेगा माध्यम
पीएम ने कहा, ये नया संसद भवन योजना को यथार्थ से, नीति को निर्माण से, इच्छाशक्ति को क्रिया शक्ति से, संकल्प से सिद्धि से जोड़ने वाली अहम कड़ी साबित होगा। ये नया भवन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपने को साकार करने का माध्यम बनेगा। ये नया भवन आत्मनिर्भर भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा। ये नया भवन विकसित भारत के संकल्पों की सिद्धि होते हुए देखेगा। ये नया भवन नूतन और पुरातन के सहअस्तित्व का भी आदर्श है। 


नए रास्तों पर चलकर ही नए प्रतिमान गढ़े जाते हैं

उन्होंने यह भी कहा, नए रास्तों पर चलकर ही नए प्रतिमान गढ़े जाते हैं। आज नया भारत नए लक्ष्य तय कर रहा है, नए रास्ते गढ़ रहा है, नया जोश है, नया उमंग है, नया सफर है, नई सोच है, दिशा नई है, दृष्टि नई है। संकल्प नया है, विश्वास नया है। आज फिर एक बार पूरा विश्व भारत को भारत के संकल्प की दृढ़ता को, भारतवासियों को प्रखरता को, भारतीय जनशक्ति की जिजीविषा को आदर और उम्मीद के भाव से देख रहा है। जब भारत आगे बढ़ता है, तो विश्व आगे बढ़ता है। संसद का ये नया भवन भारत के विकास से विश्व के विकास का भी आह्वान करेगा। 


नए संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी तो ‘सेंगोल’ देता रहेगा सभी को प्रेरणा 
पीएम ने आगे कहा, आज इस ऐतिहासिक अवसर पर कुछ देर पहले संसद की इस नई इमारत में पवित्र सेंगोल की भी स्थापना हुई है। महान चोल साम्राज्य में सेंगोल को कर्तव्य पथ का, सेवा पथ का, राष्ट्र पथ का प्रतीक माना जाता था। राजाजी और आदिनम के संतों के मार्गदर्शन में यही सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था। पीएम मोदी ने बताया कि तमिलनाडु से विशेषतौर पर आए हुए आदिनम के संत आज सुबह संसद भवन में हमें आशीर्वाद देने उपस्थित हुए थे। पीएम ने अपने संबोधन के दौरान संतों को पुन: श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि उनके ही मार्गदर्शन में लोकसभा में ये पवित्र सेंगोल स्थापित हुआ है। पीएम ने कहा कि पिछले दिनों मीडिया में इसके इतिहास से जुड़ी बहुत सारी जानकारी उजागर हुई है। मैं उसके विस्तार में नहीं जाना चाहता, लेकिन मैं मानता हूं कि इस पवित्र सेंगोल को हम उसकी गरिमा लौटा सकें हैं, उसकी मान मर्यादा लौटा सके हैं। जब भी इस संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी, ये सेंगोल हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा। 


जो रुक जाता है-उसका भाग्य भी रुक जाता है

पीएम ने कहा, भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र ही नहीं बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है। भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का भी बहुत बड़ा आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक व्यवस्था नहीं एक संस्था है, एक विचार है, एक परंपरा है। हमारे वेद हमें सभाओं और समितियों के लोकतांत्रिक आदर्श सिखाते हैं। महाभारत जैसे ग्रंथों, गणों और गणतंत्रों की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। हमने वैशाली जैसे गणतंत्रों को जीकर दिखाया है। हमने भगवान बसवेश्वर के अनुभव मंटपा को अपना गौरव माना है। तमिलनाडु में मिली 900 ईसवी का शिलालेख आज भी हर किसी को हैरान कर देता है। हमारा लोकतंत्र ही हमारी प्रेरणा है, हमारा संविधान हमारा संकल्प है। इस प्रेरणा इस संकल्प की सबसे श्रेष्ठ प्रतिनिधी गर कोई है तो वो हमारे देश की ये संसद है और ये संसद देश की जिस संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है, उसका उद्घोष करती है, शेते निपद्य-मानस्य चराति चरतो भगः चरैवेति, चरैवेति- चरैवेति॥ कहने का तात्पर्य है कि जो रुक जाता है-उसका भाग्य भी रुक जाता है लेकिन जो चलता रहता है, उसी का भाग्य आगे बढ़ता है और बुलंदियों को छूता है। इसलिए चलते रहो। 


गुलामी के बाद हमारे भारत ने बहुत कुछ खोकर अपनी नई यात्रा शुरू की 
पीएम ने कहा, गुलामी के बाद हमारे भारत ने बहुत कुछ खोकर अपनी नई यात्रा शुरू की थी, वो यात्रा कितने ही उतार चढ़ावों से होते हुए, कितनी ही चुनौतियों को पार करते हुए आजादी के अमृत काल में प्रवेश कर चुकी है। आजादी का ये अमृतकाल विरासत को सहेजते हुए विकास के नए आयाम गढ़ने का अमृतकाल है। आजादी का ये अमृतकाल देश को नई दिशा देने का अमृतकाल है। आजादी का ये अमृतकाल अनंत सपनों को असंख्य आकांक्षाओं को पूरा करने का अमृतकाल है। इस अमृतकाल का आह्वान है… 


मुक्त मातृभूमि को नवीन मान चाहिए, नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए ।
मुक्त गीत हो रहा, नवीर राग चाहिए, नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए ।।


हमारे पास अमृतकाल खंड के 25 साल 
इसलिए भारत के भविष्य को उज्जवल बनाने वाली इस कार्यस्थली को भी उतना ही नवीन होना चाहिए।उन्होंने कहा कि हमारे पास अमृतकाल खंड के 25 साल हैं। हमें मिलकर इस अवधि में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। विश्व स्तर पर हम पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि एक ‘विकसित भारत’ कई अन्य देशों को प्रेरित करेगा। कई वर्षों के विदेशी शासन ने हमारा गौरव हमसे छीन लिया। आज भारत उस औपनिवेशिक मानसिकता को पीछे छोड़ चुका है। सेंगोल अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक था और हमने उसको उचित सम्मान दिया है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि पंचायत भवन से लेकर संसद भवन तक देश और देशवासियों का विकास हमारा संकल्प और प्रेरणा बना हुआ है। उन्हें संतोष है कि पिछले 9 वर्षों में देश में 4 करोड़ गरीबों के लिए घर और 11 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ है। नई संसद में आधुनिक सुविधाओं की बात करते हैं तो उन्हें संतोष होता है कि हमने देश के गांवों को जोड़ने के लिए 4 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया है।


नया संसद भवन भारत के लोकतंत्र का उपहार
नए भवन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पुराने संसद भवन में काम पूरा करना मुश्किल होता था और इस बात से सभी वाकिफ हैं। बैठने की जगह की कमी थी और तकनीकी दिक्कतें भी थीं। इसलिए दो दशक से भी अधिक समय से नए संसद भवन के निर्माण पर चर्चा चल रही थी। उन्होंने नए भवन को अमृत महोत्सव में भारत के लोगों को उनके लोकतंत्र का उपहार बताया। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है। भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का भी बहुत बड़ा आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, एक संस्कार है, एक विचार है, एक परंपरा है।


75 रुपये मूल्यवर्ग का सिक्का और डाक टिकट जारी
नए संसद भवन के उद्घाटन को चिह्नित करने के लिए पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर 75 रुपये मूल्यवर्ग का सिक्का और डाक टिकट जारी किया। वह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और अन्य मंत्रियों के साथ आज दोपहर संसद सदस्य के तौर पर नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में पहुंचे। समारोह की शुरुआत संसद के सभी सदस्यों, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा राष्ट्रगान के गायन के साथ हुई। इस दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने नई संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ के संदेश पढ़े। 


महत्वपूर्ण मील का पत्थर 
उपसभापति हरिवंश ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि यह अमृत काल में प्रेरणा का स्रोत साबित होगा। उन्होंने कहा, यह बेहद खुशी की बात है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में 2.5 साल से भी कम समय में एक नई आधुनिक संसद का निर्माण किया गया। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सभा को संबोधित किया।


इससे पहले सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवनिर्मित संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित किया। वह सुबह करीब 7:20 बजे नवनिर्मित संसद भवन पहुंचे और महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके पश्चात प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के साथ सेंगोल (राजदंड) स्थापित किया।


नई संसद में हवन करने और सेंगोल रखने के बाद, पीएम मोदी ने नई संसद भवन के उद्घाटन को चिह्नित करने के लिए पट्टिका का अनावरण किया। उसके बाद उन्होंने नए संसद भवन के निर्माण में शामिल लोगों का अभिनंदन किया। पीएम मोदी के साथ लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों ने भी सर्व धर्म प्रार्थना में भाग लिया।


आत्मनिर्भर भारत की भावना का प्रतीक
उल्लेखनीय है कि संसद का नया भवन आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर भारत की भावना का प्रतीक है। नवनिर्मित संसद भवन को गुणवत्तापूर्ण निर्माण के साथ रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को संसद के नए भवन की आधारशिला रखी।



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