July 18, 2024

VINDHYA CITY NEWS

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SINGRAULI NEWS : लाइसेंस और प्रशासन की अनुमति के बिना होता है करोड़ों का कारोबार, इस कारोबार में किसी का नहीं है नियंत्रण धड़ल्ले से फल-फूल रहा है अवैध कबाड़ के व्यवसाय कारोबार।

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जिला बनने के पूर्व से ही सीकेडी माफिया ने जिस तरह से अपनी जड़े सिंगरौली में जमाई थी उन जड़ों को जिला प्रशासन उखाड़ नहीं पाया है और दिनोंदिन यह गोरखधंधा बड़े पैमाने पर बेखौफ होकर संचालित किया जाता है.

अब जाहिर सी बात है कि छोटी से छोटी कार्यवाही करने वाले प्रशासन को आखिरकार इस तरह के अवैध कारोबारियों पर कार्यवाही करने में मुश्किलों का सामना क्यों करना पड़ता है यह समझ से परे है इस तरह की अवैध कारोबार से एक तरफ जहां कंपनियों को लाखों करोड़ों रुपए की क्षति हर वर्ष होती है तो वहीं दूसरी तरफ सीकेडी माफिया के साथ कंपनियों के लोगों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है ।

बिनालाइसेंस और प्रशासन की अनुमति के बिना भी होता है करोड़ों का कारोबार,

इस कारोबार में किसी का नहीं है नियंत्रण। धड़ल्ले से फल-फूल रहा है अवैध कारोबार। छोटे बच्चों को धंधे में लगा कर धकेल रहे अपराध की दुनिया में। जिले में दो दर्जन से अधिक कबाड़ के व्यवसायी हैं। जो साल में करोड़ों का कारोबार करते हैं। जिले में इन दिनों धड़ल्ले से कबाडिय़ों का अवैध कारोबार चल रहा है।

इस व्यवसाय को करने के लिए तो किसी को लाइसेंस की जरूरत होती है और ही किसी की अनुमति की आवश्यकता होती है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सिर्फ एक स्टाक रजिस्टर की जरूरत होती है। स्टॉक रजिस्टर में खरीद-बिक्री किए गए समान को दर्ज कर इस व्यवसाय को आसानी से किया जा सकता है।

इस व्यवसाय में पुलिस और प्रशासन का कोई रोकटोक नहीं होता है। मजेदार बात यह कि जिले में दो दर्जन से भी अधिक कबाड़ के व्यवसायी हैं। जो बेरोकटोक बेखौफ कारोबार कर रहे हैं। इन पर किसी का नियंत्रण नहीं होने से जिले में दिनो दिन कबाडिय़ों की संख्या बढ़ती जा रही है।

कबाड़ी बिना सत्यापन के साइकिल, मोटरसाइकिल एवं अन्य चोरियों के समाना को बेधड़क खरीद रहे हैं। इस व्यवसाय में जिले के बाहर से आए लोग सक्रिय हैं। उनके द्वारा ही जिले में इस व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है।

आलम यह है कि पुलिस कबाडिय़ों पर नकेल नहीं कस पा रही है। कभी कभार ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी की जाती है। जिले में अक्सर सोलर प्लेट, साइकिल बाइक चोरी की घटनाएं होती रहती हैं।

दिन-दहाड़े सार्वजनिक स्थानों से साइकिल और बाइक चोरी हो रहीं हैं। साइकिल चोरी होने पर अमूमन लोग थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते, क्योंकि पुलिस इसे छोटा मामला बताकर ध्यान नहीं देती। बाइक और साइकिल चोरी की रिपोर्ट तो लिखी जाती है,

लेकिन अक्सर ये वापस नहीं मिलते। इसका कारण यह है कि चोरी की साइकिल और बाइक के कलपुर्जे को अलग-अलग कर कबाड़ में बेच दिया जाता है। इसके अलावा इस धंधे में लोहे के सामान घरेलू उपयोग के सामान सहित कई कीमती समान पानी के मोल कबाड़ी अपने दलालों के माध्यम से खरीद कर करोड़ोंं कमाते है।कबाड़ के धंधे में बच्चे भी है लिप्त
कई मामले ऐसे भी आए हैं, जिनमें कबाड़ी बच्चों से चोरी के माल खरीदते हैं। वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किशोरों को चोरी करने के लिए प्रेरित करते हैं। ये किशोर प्राय: गरीब तबके के होते हैं।

पारिवारिक व सामाजिक मार्गदर्शन नहीं मिलने से वे घरो के आसपास फेंके गए कचरे में से कबाड़ चुनते है बाद में इन बच्चों पर पारिवारिक नियंत्रण नहीं होने के कारण नशे के गिरफ्त में आ जाते है और अपनी आवश्यकता की पूर्तिलिए चोरी के धंधे में उतर आते है।

कबाड़ व्यवसायियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं,
कबाड़ का व्यवसाय करने वालों के खिलाफ पुलिस के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने से इनके हौसले बुलंद हो गए हैंऔर ये बेधड़क चोरी के सामानों की खरीद बिक्री के काम में लगे हुए हैं।

यदि पुलिस के द्वारा ऐसे व्यवासियों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो जिले से चोरी हुए कई समान इनके पास से बरामद हो सकता है। यहां के कबाड़ियों के पास ज्यादातर भवन निर्माण में उपयोग होने वाले छड़,वाहनों के चक्के एवं अन्य सामाग्री आसानी से बरामद किया जा सकता है। इसके साथ ही इस मार्ग से बड़ी मात्रा में ट्रकों में कबाड़ भर कर कानपूर की ओर माल सप्लाई कर दिया जाता है।

दर्जन से अधिक हैं कबाड़ व्यवसायी,


इस धंधे में कोई रोकटोक नहीं होने के कारण कहीं भी कोई भी व्यक्ति आकर कबाड़ का दुकान चलाना शुरू कर देते हैं। शुरू-शुरू में एक दो एजेंट रख कर शहर के कबाड़ इकट्ठा करवा कर खरीदते हैं। बाद में इनके एजेंट बढ़ जाते हैं। इसमें किशोर बच्चे भी होते हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कबाड़ी इनसे कम में कबाड़ का सामान खरीद कर थोक में अधिक रकम कमाते हैं। खासबात तो यह है कि जिले में कितने कबाड़ी हैं यह भी किसी के पास रिकार्ड में नहीं है। ये कबाड़ी कम दिनों में लाखों रुपए का कारोबार कर रहे हैं। जिले के नवानगर थाना क्षेत्र में ही लगभग आधा दर्जन कबाड़ी हैं। इसके अलावा जिले भर में एक अनुमान के मुताबिक एक दर्जन से भी अधिक कबाड़ का व्यवसाय करते हैं।

इनका कहना है,


सम्बंधित मामले में थाना प्रभारी ने बताया की हमारे द्वारा सभी कबाड़ व्यवसायिओं का लगातार चेकिंग की जाती है और सभी रिकॉर्ड चेक किये जाते है।

रावेन्द्र द्विवेदी (नवानगर थाना प्रभारी)


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