April 14, 2024

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कटनी में मिला दुर्लभ धातुओं का खजाना, देशभर की बदल जाएगी तस्वीर

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कटनी भी होगा देश का प्रमुख जिला जहां की धरती उगलेगी दुर्लभ व बेशकीमती धातुएं
भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने शहर की आसपास की खदानों में पाया है वनेडियम, लीथियम, टाइटेनियम, कोबाल्ट, ग्रेमियम व प्लेटिनम धातु, 1995 से चल रही थी खोज
एक साल के अंदर जीएसआइ विभाग शुरू करेगा 4-जी लेवल पर काम।
बालमीक पांडेय @ कटनी. भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (जीएसआई) ने कटनी में एक बड़ी खोज की है। विश्व की बहुकीमती धातुओं का खजाना होना प्रारंभिक सर्वे में ही पा लिया है। जो न सिर्फ कीमती बल्कि देश के लिए बड़ा उपयोगी है। खनिज संपदा में मार्बल, डोलोमाइट, मैग्नीज में सुर्खियां बटोरने वाला जिले का नाम अब शीघ्र ही विश्वपटल पर होगा। क्योंकि कटनी शहर के आसपास की लेटराइट वाली खदानों में बेशकीमती धातु वनेडियम, लीथियम, टाइटेनियम, कोबाल्ट, ग्रेमियम, प्लेटिनम का होना पाया गया है। इन धातुओं की खोज जीएसआई द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में 1995 से की जा रही थी। जिले में 10 साल से सर्वे चल रहा था।
जीएसआइ के अनुसार इन कीमती धातुओं के लिए कटनी में बड़ा स्कोप है। जिसपर शीघ्र काम शुरू होने वाला है। क्रिटिकल मिनरल्स के लिए काम काम चालू होने वाला है। निकेलम और कोबाल्ट धातु निकालने का लक्ष्य है पहले तय किया गया है। शीघ्र प्रक्रिया शुरू हो गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक सर्वे हो गया है, उसमें बेहतर परिणाम आए हैं। इब इसके लिए जी-4 लेवल पर काम शुरू किया जाना है। अच्छा माल आने पर प्रोजेक्ट को आगे ले जाया जाएगा।
मिसाइल, बैटरी बनाने में होगा धातुओं का प्रयोग
कटनी शहर के आसपास जो भी लेटराइट निकल रहा है, उसमें हाइ क्वालिटिकी की क्रिटिकल धातुएं पाई जा रही हैं। इसमें सैलेनियम, निकेल, टाइटेनियम, कोबाल्ट, ग्रेनियम, प्लेटिनम, बैनेडियम, क्रोमियम, लीथियम धातु शामिल हैं। यह कहीं पर ही बड़ी मुश्किल में मिलती हैं। विभाग के अनुसार इन अधिकांश धातुओं का देश में आयात हो रहा हैं। जानकारी के मुताबिक जीएसआइ के प्रारंभिक सर्वे में धातुओं के होने के प्रमाण मिले हैं। इसके बाद अब इसके लिए बड़ा निर्णय लिया जा रहा है। लेटराइट के माइनर मिनलर बंद करना है। इसे मेजर मिनलर में शामिल किया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि ये धातुएं बहुत ही कीमती हैं, इंडिया में मिलती नहीं हैं। इनका उपयोग मिसाइल बनाने में होता है।

टैक्नोलॉजी के साथ शुरू होगा काम
टैक्नोलॉजी न होने के कारण इस सेक्टर में काम शुरू नहीं हो पा रहा है। इस धातु को निकालकर इसका सोधन करते हुए देश में ही उपयोग के लिए तैयार करने बहुत बड़ी इंडस्ट्री तैयार करना बेहद आवश्यक है। विभाग के अफसर मानते हैं कि हर हाल में देश में टैक्नोलॉजी लानी होगी, क्योंकि यह बड़ी मेहनत से खोज की गई है। 8 माह तक अफसरों व वैज्ञानिकों ने इसकी खोज की है। वैज्ञानिक यह बात भी कह रहे हैं कि यदि इस खोज का सदुपयोग देश के लिए नहीं हो पाया तो पूरी मेहनत बेकार चली जाएगी। इसे निकालकर सोधन के लिए विदेश भेजना कदापि उचित नहीं होगा। प्रारंभिक सर्वे में यह बात सिद्ध हो गई है कि कीमती धातुएं पर्याप्त मात्रा में हैं।
प्रोजेक्ट के लिए जारी हैं प्रयास
इस प्रोजेक्टर को चालू करने के लिए 4 साल से जीएसआइ विभाग प्रयास कर रहा है। नया क्षेत्र और नई तकनीक से इसे निकालना सबसे बड़ी चुनौती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इन धातुओं के लिए काम होता है, इसलिए हर बाधा को दूर करते हुए इस पर काम किया जाना बेहद आवश्यक है। प्रारंभिक सर्वे में मिली बड़ी सफलता के बाद जीएसआइ मुख्यालय भोपाल द्वारा केंद्रीय मुख्यालय कलकत्ता को दो बार प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। अब सिर्फ अनुमति के लिए इंतजार है। किस पद्धति से इन धातुओं को निकाला जाएगा, अब इसपर प्लानिंग की जा रही है। इस साल काम शुरू होने की पूरी संभावना है। साइंटिफिके-वे में काम होना है। विभाग को यह प्लान सिद्ध करके देना है कि विदेशों में इस पद्धति से धातुओं को निकालने और सोधन का काम हो रहा है, – बैनाडियम को निकालने के लिए जीएसआइ विभाग ने चैलेंस के रूप में लिया है टास्क, डिफेंस मिनरल्स के लिए होगा तेजी से काम।
– विभाग का मानना है कि लीथियम बैटरी में लगाने पर 100 साल के लिए बिजली सुरक्षित की जा सकेगी, मिसाइल के खोल तैयार करने में भी इस धातु का उपयोग हो हो रहा है।
– 1300 डिग्री टैप्रेंचर में भी यह नहीं जलता है। इससे बैटरी इंडस्ट्री तैयार होने से सस्ती बैटरियां लोगों को आसानी से मिल सकेंगी। सरकार और विभागों को संयुक्त निर्णय लेकर आगे की शुरू करनी होगी प्रक्रिया।
– कटनी देश के विकास के लिए बड़ा कारगर शहर साबित होगी, देश में ग्रीन एनर्जी सिस्टम को खड़ा करने में बड़ा योगदान हो सकेगा, धातुओं के विदेशों से आयात का समस्या होगी खत्म।

इन देशों में है धतुओं की उपलब्धता व उपयोगिता
जानकारी के अनुसार वनेडियम चीन, रूस, दक्षिण आफ्रिका, अरुणाचाल प्रदेश आदि में पाई जाती है। अब कटनी में भी इसकी प्रचुर मात्रा होने की संभवना है। इसका उपयोग स्टील निर्माण में होता है। लीथियम जो कि मोबाइल, लैपटॉप, बैटरी में होती है। यह अमेरिका, आस्ट्रेलिया, चिली, चीन, अर्जेटीना, जम्मू कश्मीर अब कटनी में भी पाई जाने वाली है। इसी प्रकार अमेरिका, रूस, चीना, जापान, वियतमान, मोजाम्बिक सहित देश में पाई जाने वाली टाइटेनियम धातु का उपयोग लड़ाकु विमान, मिसाइल, युद्धपोत, अंतरिक्ष यान, परमाणु रियेक्टर में होता है। प्लेटिनम सबसे ज्यादा रूस, कोलम्बिया, दक्षिण आफ्रिका व अपने देश में पाई जाती है, जिसकी अब कटनी में भी संभावना है।

1995 से क्रिटिकल मिनरल्स की खोज चल रही थी ,कटनी में बड़ी सफलता मिली है। कलकत्त्ता मुख्यालय को कटनी में मिनरल्स निकालने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। हमारा काम एक्सप्लोर करके ब्लॉक देना व ब्लॉक को ऑक्सन के लिए तैयार करना होता है। आइबीएम द्वारा आगे की प्रक्रिया की जाती है। इन धातुओं की खोज से देश को बड़ा फायदा तब होगा जब यहीं पर इंडस्ट्री तैयार कर सोधन और उपयोग होगा। विशेष टैक्नोलॉजी से यहां पर काम किया जाएगा।
सुभ्रा सरकार, डिप्टी डायरेक्टर जनरल जीएसआई।


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