July 18, 2024

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नौरोजाबाद स्थित झोलाछाप बंगाली के क्लीनिक में सीएचएमओ ने की कार्यवाही

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कई अंग्रेजी दवाईयां किया जप्त lदिया गया नोटिस:- सीएचएमओ

उमरिया:- नौरोजाबाद/ उमरिया जिले के नौरोजाबाद स्थित पांच नंबर कॉलोनी में झोलाछाप डॉक्टर समीर अधिकारी के क्लीनिक में सीएचएमओ डॉ आर.के.मेहरा के द्वारा अपनी टीम के साथ छापामार कार्यवाही की गई है इस कार्यवाही पर समीर अधिकारी की क्लीनिक से कई अंग्रेजी दवाई भी बरामद किया गया है जिसे सीएचएमओ ने जप्त किया है और साथ में नोटिस भी दिया गया है। सीएचएमओ आरके मेहरा ने बताया गया कि हमारे द्वारा लगातार ऐसे फर्जी क्लीनिक और डॉक्टरों के ऊपर कार्यवाही की जा रही है। धीरे-धीरे पूरे जिले में ऐसे फर्जी चल रहे क्लीनिक और चला रहे डॉक्टरों के ऊपर कार्यवाही के साथ-साथ क्लीनिक को बंद किया जाएगा।

अब देखना यह है कि सीएचएमओ डॉक्टर आरके मेहरा के द्वारा जो नौरोजाबाद पांच नंबर कॉलोनी में झोलाछाप डॉक्टर बंगाली के क्लीनिक में दवाइयों के साथ-साथ नोटिस दिया गया उसमें क्या कारवाही करते है। आखिर कब ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान हमेशा के लिए बंद होगी और इनके द्वारा फर्जी तरीके से इलाज करके कई लाखों रुपए की संपत्ति जुटाये हुए हैं। आखिर इसमें कब उचित कार्रवाई होगी अब देखना यही है?

पूर्व में कई बार हो चुकी है सील की कार्यवाही

नौरोजाबाद में एस.के.अधिकारी के क्लीनिक में कई बार छापे मार कार्यवाही के साथ-साथ भारी मात्रा में अंग्रेजी दवाई भी बरामद की गई थी और साथ साथ सील करने की भी कार्यवाही भी कि गई थी। प्रशासनिक विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग में भी कई कार्यवाही इनके क्लीनिक में कर चुकी है लेकिन कुछ दिनों के बाद इनकी क्लीनिक खोल दी जाती है। फिर यह अपने मन मुताबिक क्लीनिक चलाने लगते हैं आखिर किसके सह में यह क्लीनिक कई जमाने से संचालित हो रही है। आम जनों की सुविधा बता कर और कम पैसे बता कर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और जिम्मेदार इससे पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

झोलाछाप के ना रहने पर नौकर चलाते हैं क्लीनिक

जब इसकी अधिकारी अपने गांव बंगाल चले जाते हैं या कहीं बाहर तो उनकी क्लीनिक और कोई नहीं उनके क्लीनिक में उपस्थित नौकर ही चलाते हैं इस फोन में सलाह लेकर डॉक्टर से और उपचार नौकर के द्वारा किया जाता है। आखिर इतने बड़ी लापरवाही रोजेदारों को नहीं दिख रही है कि जब एक झोलाछाप 10 से 15 दिन के लिए अपने क्लीनिक में उपस्थित नहीं रहता तो उसकी क्लीनिक कौन चलाता है और इस पर कार्यवाही क्यों नहीं होती।

तो बंद कर दे शहडोल जैसे मेडिकल कॉलेज

जब झोलाछाप चिकित्सक बंगाल के जादू से आम लोगों को कई बड़ी से छोटी बीमारियों इसका इलाज करते है जो बड़े-बड़े हॉस्पिटलों में और सरकारी डॉक्टर नहीं कर पाते ऐसे इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करते रहते हैं। और फिर मामला बिगड़ जाता है तो यह झोलाछाप बंगाली बड़ी हॉस्पिटल की तरफ मरीजों का रुख मोड़ देते हैं। अगर ऐसे झोलाछाप डॉक्टर आम लोगों का इलाज कर सकते हैं तो देश और प्रदेश में स्थित शहडोल जैसे शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को शायद बंद करने का समय आ गया है। शासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए कि जब बंगाल के जादू से आम लोगों का इलाज किया जा सकता है तो अरबों रुपये खर्च कर भवन बनवाने और उस पर हर महीने करोड़ों रुपए खर्च करने की आवश्यकता ही क्या है? शहडोल मेडिकल कॉलेज सहित पूरे देश के चिकित्सा महाविद्यालयों में अध्ययन कर रहे छात्रों को भी इस मामले से सबक लेना चाहिए और एमबीबीएस की डिग्री मैं पैसे बर्बाद ना कर ऐसे झोलाछाप समीर अधिकारी की तरह बंगाल का जादू सीखकर कहीं पर क्लीनिक खोलकर संचारित कर लेना चाहिए।



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