May 22, 2024

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कौन हैं इतिहास रचने वाली निकहत जरीन, हक के लिए मैरीकॉम से भी भिड़ चुकीं

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Nikhat Zareen Indian Boxer: भारतीय महिला बॉक्सर निकहत जरीन ने गुरुवार को इतिहास रच दिया। उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप (World Boxing Championship) में गोल्ड मेडल जीता है। 52 किग्रा. कैटेगरी में निकहत ने थाईलैंड की जिटपॉन्ग जुटामस (Jitpong Jutamas) को 5-0 से करारी शिकस्त दी।

25 साल की निकहत जरीन 5वीं भारतीय महिला बॉक्सर हैं, जिन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। बॉक्सिंग लीजेंड मैरीकॉम ने इस चैम्पियनशिप में 6 बार गोल्ड जीतकर रिकॉर्ड बनाया है। इस चैम्पियनशिप में मैरीकॉम, निखत के अलावा सरिता देवी, जेनी आरएल और लेखा सी से भी गोल्ड जीत चुकी हैं।

निकहत का जन्म 14 जून 1996 को तेलंगाना के निजामाबाद में हुआ था। उनके पिता मुहम्मद जमील अहमद और माता परवीन सुल्ताना हैं। निकहत ने 13 साल की उम्र में ही बाक्सिंग ग्लव्स थाम लिए थे। निकहत की लीजेंड एमसी मैरीकाम से कई बार भिड़ंत भी हुई है।

मैरीकॉम के स्टारडम के तहत दबकर निखरने वाली निकहत ने यहां तक का सफर बड़ी कठिनाइयों के साथ तय किया है। पहले उन्हें अपने समाज से लड़ना पड़ा, फिर उन्हें अपने ही खेल में अपने ही देश की मैरीकॉम जैसी प्रतिभागियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसमें एक बात जरीन के लिए अच्छी थी कि उनके पिता मोहम्मद जमील का उन्हें पूरा सपोर्ट मिला है।

भारतीय बॉक्सिंग फेडरेशन ने मैरीकॉम को टोक्यो ओलंपिक में बगैर ट्रायल के 51 किग्रा कैटेगरी के लिए सेलेक्ट किया था। तब के चेयरमैन राजेश भंडारी ने कहा था कि निकहत को भविष्य के लिए सेव कर रहे हैं। ऐसे में निकहत ने इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए खेल मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखा था।

इस पूरे विवाद के बाद मैरीकॉम का ट्रायल हुआ था। उनका मुकाबला निकहत से कराया गया, जिसमें मैरीकॉम ने जीत दर्ज की थी। इन दोनों बॉक्सर के बीच टशन इतना था कि जीत के बाद मैरीकॉम ने निकहत से हाथ भी नहीं मिलाया था।

जब निकहत ने टोक्यो ओलंपिक के लिए ट्रायल की मांग की थी, तब मैरीकॉम ने प्रेस के सामने पूछा था, ‘निकहत जरीन कौन है?’ अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने के बाद जरीन ने उन्हें जवाब दिया है। बताया है कि निकहत वर्ल्ड चैम्पियन है। मेडल जीतने के बाद निकहत ने प्रेस से पूछा- क्या मेरा नाम ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है?

निकहत ने करियर का पहला मेडल 2010 में नेशनल सब जूनियर मीट में जीता था। इसके अगले साल ही 15 साल की उम्र में निकहत ने देश को इंटरनेशनल गोल्ड मेडल दिलाया था। उन्होंने तुर्की में 2011 महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के फ्लाइवेट में स्वर्ण जीता था।

सभी को अपना रास्ता खुद ही बनाना पड़ता है’

जमील ने कहा, ‘वर्ल्ड चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतना एक ऐसी कामयाबी है, जो मुस्लिम के साथ देश की हर एक लड़की के लिए कामयाबी हासिल करने के लिए प्रेरणा का काम करेगी। चाहे लड़का हो या लड़की, सभी को अपना रास्ता खुद ही बनाना पड़ता है। निकहत ने भी ऐसा ही किया है।



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